अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 519, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषाधर्मसंहिता ॥ ५३
संवत्सरंव्रतंकुर्याच्छित्त्वावृक्षंफलप्रदम् ॥ ५३ ॥
दिवाचमैथुनंगत्वा स्नात्वानग्नस्तथाम्भसि ।
नग्नांपरस्त्रियंदृष्ट्वा दिनमेकंव्रतीभवेत् ॥ ५४ ॥
क्षिप्त्याग्नावशुचिद्रव्यं तदेवाम्भसिमानवः ।
मासमेकंव्रतंकुर्यादुपक्रुध्यत्तथागुरुम् ॥ ५५ ॥
पातावशेषंपानीयं पीत्वाचब्राह्मणःक्वचित् ।
त्रिरात्रंतुव्रतंकुर्याद्वामहस्तेनवापुनः ॥ ५६ ॥
एकपङ्क्त्युपविष्टेषु विषमंयःप्रयच्छति ।
सचनावदसौपक्षं कुर्यात्तुब्राह्मणोव्रतम् ॥ ५७ ॥
धारयित्वा तुलाधार्यं विषमं कारयेद्बुधः ।
सुरालवणमद्यानां दिनमेकंव्रतीभवेत् ॥ ५८ ॥
मांसस्यविक्रयं कृत्वा कुर्याञ्चैवमहाव्रतम् ।
विक्रीयपणिनामद्यं तिलस्यचतथाचरेत् ॥ ५९ ॥
हुंकारंब्राह्मणस्योक्त्वा त्वंकारंचगरीयसः ।
दिनमेकंव्रतंकुर्यात् प्रयतःसुसमाहितः ॥ ६० ॥
प्रेतस्यप्रेतकार्याणि अकृत्वाधनहारकः ।
( युद्ध ) में पीठ दे कर भाग आवै तो एक वर्ष तक व्रत करै, फल देने हुए वृक्ष को काट कर ॥ ५३ ॥ दिन में मैथुन करके, नंगा होकर जलाशय में स्नान करके और अन्य की स्त्री को नंगी देखकर एक दिन व्रत करे ॥ ५४ ॥ अग्नि और जल में अशुद्ध पदार्थ डाल कर, और गुरु पर क्रोध करके एक मास तक व्रत करे ॥ ५५ ॥ और पीने में बचे पानी को ब्राह्मण कदाचित् पीकर, और बाये हाथ से जल पीकर तीन दिन व्रत करै ॥ ५६ ॥ एक पङ्क्ति में बैठे हुओं के आगे जो विषम किसी मित्र या प्रतिष्ठित को उत्तम पदार्थ तथा अन्यों को साधारण वस्तु परोसे जिसको अच्छा परोसा हो वह और परोसने वाला दोनों पन्द्रह दिन व्रत करें ॥ ५७ ॥ तौला को रखकर जो कम तुलवावे तथा सुरा, मदिरा, लवण, मद्य, इनको बेंचै या बिकवावे वह एक दिन व्रत करै ॥ ५८ ॥ मांस को बेंच कर महाव्रत करे । अपने हाथ से मदिरा और तिलों को बेंच कर भी महाव्रत करे ॥ ५९ ॥ और ब्राह्मण को हुंः और बड़े प्रतिष्ठित पुरुष को तू कह कर सावधान होके एकाग्र मन से एक दिन व्रत करै ॥ ६० ॥ मरे मनुष्य के दाहादि कर्म न करके उस के धनादि सामान को लेने