अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 589, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ९१
च सन्निपाते परस्य ॥२॥ स्वनाम प्रोच्याहमयमित्यभित्रादो ऽज्ञसमवाये स्त्रीपुंयोगेऽभिवादतोऽनियममेके नाविप्रोष्य स्त्री- णाममातृपितृव्यभार्याभगिनीनां नोपसंग्रहणं भ्रातृभार्याणां श्वश्रूवाश्च ॥३॥ ऋत्विक्श्वशुरपितृव्यमातुलानां तु यवीयसां प्रत्युत्थानमनभिवाद्यास्तथान्यः पौर्व्वः पौरोऽशीतिकावरः शूद्रोप्यपत्यसमेनावरोऽप्यार्य्यः शूद्रेण नाम चास्य वर्ज्जयेद् राज्ञश्चाजपःप्रेष्यो भोभवन्निति वयस्यः समानेऽहनि जातो दशवर्षवृद्धः पौरः पञ्चभिः कलाभ रःश्रोत्रियस्सदाचरणस्त्रिभिः,
उत्तर गुरुओं के गुरु एकत्र इकट्ठे हों तो गुरुओं के गुरुओं को अभिवादन करे ॥२॥
अभिवादन की रीति यह है कि “देवशर्माऽहमयमभिवादये” क्षत्रिय हो तो शर्मा के स्थान में वर्मा कहे । बिन पढे पुरुष तथा स्त्री पुरुषों के मेल मिलाप के समय स्त्रियों को अभिवादन करने का अवसर हो तो अभिवादन के वाक्य का नियम नहीं है यह किन्ही आचार्यों की राय है कि वहां लोक भाषा में प्रचरित शब्द बोलकर (, जिसे वे लोग ठीक समझते हों) अभिवादन करे ।
विदेश में गये बिना नाते रिश्ते की सब स्त्रियों को नित्यश अभिवादन न करे । परन्तु माता, चाची, बड़ी भगिनी, बड़ी भौजाई (भावज) और सासु इन सब को तो नित्यश पादस्पर्श पूर्वक अभिवादन करे ॥ ३ ॥
ऋत्विज्, श्वशुर, चाचा, और मामा ये लोग युवावस्था के हों तो आते देख के उठ खड़ा हो किन्तु अभिवादन न करे । तथा अपने ग्राम नगर का निवासी क्षत्रियादि अपने से बड़ा आवे तो भी अभिवादन न करे किन्तु उठके खड़ा हो जावे । ८० अस्सी वर्ष से भीतर के शूद्र को बालक के समान समझे। छोटे भी ब्राह्मणदि द्विज को शूद्र अभिवादन (प्रणाम) करे । जिस को अभिवादन किया जाय उसका नाम नहीं लेना चाहिये । कम बोलने वाला अधिकावस्था का भी राजा का नौकर (भोभवन्नभिवादये) ऐसा कहके अभिवादन बड़ों को करे ।
एक ग्राम वा नगर के रहनेवाले गुण कर्महीन साधारण हों तो चाहें वे बराबर आयुवाले हों वा दशवर्ष तक कम ज्यादा हों तो भी बराबर के माने जावेंगे । बराबर वालों कासा व्यवहार करें । और इन में जो कोई विशेष गुणवान् हो तो वह पांच वर्ष तक बड़ा होने पर बराबर माना जायगा । पांच वर्ष से अधिक बड़ा होगा तो बड़ा