अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 593, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ २१
र्यो राजा वध्यश्चावध्यश्चादण्डयश्चावहिष्कार्य्यश्चापरि- वाद्यश्चापरिहार्य्यश्चेति ॥२॥ गर्भाधानपुंसवनसीमन्तोन्नयन- जातकर्मनामकरणान्नप्राशनचौडोपनयनं चत्वारि वेदव्रता- नि स्नानं सहधर्म्मचारिणीसंयोगः पञ्चानां यज्ञानामनुष्ठानं देवपितृमनुष्यभूतब्रह्मणामेतेषां चाष्टकापार्व्वणश्राद्धश्रावण्या- ग्रहायणीचैत्र्याश्वयुजीति सप्त पाकयज्ञसंस्था अग्न्याधेयम ग्निहोत्रदर्शपूर्णमासावाग्रयणं चातुर्मास्यनिरूढपशुबन्धसौ- त्रामणीति सप्त हविर्यज्ञसंस्था अग्निष्टोमोऽत्यग्निष्टोम उक्थ्यः षोडशी वाजपेयोऽतिरात्रोऽप्तोर्यामइति सप्त सोमसंस्था इ-
दण्डदेने, देश निकाला देने, निन्दित करने और तिरस्कार करने योग्य वह नहीं है ॥ २ ॥ अब चालीस संस्कार गिनाते हैं—१-गर्भाधान। २- पुंसवन । ३-सी- मन्तोन्नयन । ४-जातकर्म । ५-नामकरण । ६-अन्नप्राशन । ७-चूड़ाकर्म । ८- उपनयन । चारो वेदों के व्रत ९ । १० ११ । १२ । चार वेदारम्भ १३-समावर्त्तन स्नान। १४-विवाह ( सहधर्मचारिणी के साथ संयोग) । १५-देवयज्ञ। १६-पितृय ज्ञ । १७-मनुष्य ( अतिथि ) यज्ञ । १८-भूतयज्ञ ( बलिकर्म ) । १९-ब्रह्मयज्ञ । २०-तीनों अष्टका और एक अन्वष्टका श्राद्ध । २१-सद्य पार्व्वण श्राद्ध। २२--पि- ण्ड पितृयज्ञ वा एकोद्दिष्ट त्र्याह आदि श्राद्ध । २३-श्रावणी कर्म (उपाकर्म ) । २४-आग्रहायणी (मार्गशिर की पौर्णमासी को होने वाला यज्ञ ) कर्म । २५ चैत्री ( चैत्र की पौर्णमासी का यज्ञ ) कर्म । २६—आश्वयुजी ( आश्विन की पूर्णमासी का यज्ञ ) कर्म । ये अष्टका श्राद्धादि सात पाकयज्ञ कहाते हैं । २७ श्रौतस्मार्त्त अग्नियों का स्थापन और तत्सम्बन्धी पवमानेष्ट्यादि कर्म । २८- श्रौतस्मार्त्त सायं प्रातःकाल का नित्यग्निहोत्र । २९-दर्शपूर्णमास इष्टि । ३०- आग्रयणेष्टिक (नवान्नेष्टि) ३१-चातुर्मास्ययागों के चारो पर्व। ३२- निरूढ पशु बन्ध ( पशुयाग कर्म यह श्रौत है ) कर्म । ३३-सौत्रामणीयज्ञ । अग्न्याधान से लेकर ये सातो हविष्यान्न ( चरु पुरोडाशादि से होने वाले ) हविर्यज्ञ क- हाते हैं । ३४-अग्निष्टोम । ३५-अत्यग्निष्टोम । ३६-उक्थ्य।३७--षोडशी । ३८-वाजपेय । ३९-अतिरात्र । ४०-अप्तोर्याम । ये अग्निष्टोमादि सात