अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 606, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३४ | गौतमस्मृतिः ॥ |
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शूद्रो द्विजातीनभिसंधायाभिहत्य च वाग्दण्डपारुण्या- भ्यामङ्गेन मोच्यो येनोपहन्यादार्यस्त्र्यभिगमने लिङ्गोद्धारः स्वप्रहरणं च गोप्ता चेद्वधोऽधिकोऽथाहास्य वेदमुपशृण्व- तस्त्रपुजतुभ्यां श्रोत्रप्रतिपूरणमुदाहरणे जिह्वाच्छेदो धारणे शरीरभेद आसनशयनवावपथिषु समप्रेप्सुर्दण्ड्यः शतम् ॥१॥ क्षत्रियो ब्राह्मणाक्रोशे दण्डपारुष्ये द्विगुणमध्यक्षं वैश्यो ब्रा- ह्मणस्तु क्षत्रिये पञ्चाशत्तदधं वैश्ये न शूद्रे किंचित,ब्राह्मण राजन्यवत् क्षत्रियवैश्यावष्टापाद्यं स्तेयकिल्विषं शूद्रस्य द्वि- गुणोत्तराणीतरेषां प्रतिवर्णं विदुषोऽतिक्रमे दण्डभूयस्त्वं
शूद्र पुरुष यदि ब्राह्मणादि द्विजों के निकट आके वा संकेत करके गा- ली देवै धमकावै वा लकड़ी आदि से मारे पीटे तो जिस अङ्ग से वह अपरा- ध करे राजा उसी अंग को कटवा देवे । यदि द्विजों की स्त्रियों के साथ शूद्र व्यभिचार करे तो लिङ्गेन्द्रिय को कटवा देवे और उस शूद्र का धनादि प- दार्थ छीन लेवे (जुर्माना करदे) यदि वह अपनी रक्षा करता हो तो राजा वध करा देवे । यदि समझ पूर्वक वेद को सुनता हो तो शीशा और जस्ता- पिघला कर कानों में डलवा देवे । यदि वेद का स्वयं उच्चारण करे तो शूद्र की जिह्वा कटवादेवे यदि शूद्र ने वेदों को कण्ठस्थ किया हो तो शिर कटवा के मरवा डाले । यदि आसन, शय्या (सेज, ) वाणी बोलने और मार्ग में चलने की बराबरी ब्राह्मणादि के साथ शूद्र करे तो राजा उस पर सौ रुपये दण्ड (जुर्माना) करे ॥१॥ यदि क्षत्रिय ब्राह्मण को गाली दे वा धमकावे, निन्दा करे तो दो सौ रुपये दण्ड (जुर्माना ) करे । यदि वैश्य, ब्राह्मण की निन्दादि करे तो १५०) डेढ़ सौ रू० दण्ड (जुर्माना ) करे । यदि ब्राह्मण, क्षत्रिय की निन्दादि करे तो ५०) रू० दण्ड, वैश्य की निन्दादि करे तो २५) रु० दण्ड देवे और शूद्र की निन्दादि करे तो कुछ भी दंड राजा न देवे । क्षत्रिय तथा वैश्य यदि शूद्र की निन्दादि करें धमकावें तो ब्राह्मण और राजा के तुल्य उन को भी कुछ दण्ड न देवे । चोरी के अपराध में जि- तना (अष्टगुणा) शूद्र को दोष लगता है तब १६ गुणा वैश्य को ३२ गुणा क्षत्रिय को और ६४ गुणा दोष ब्राह्मण को लगता है । विद्वान् का निरादर करने पर शूद्र, वैश्य, क्षत्रिय और ब्राह्मण इन को क्रमशः अधिक २ दंड हो-