अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 670, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें२४ शातातपस्मृतिः ॥
ब्राह्मणायप्रदद्याद्वै महानीलमणिद्वयम् ॥ १८ ॥ कन्दमूलस्यहरणाद् ह्रस्वपाणिःप्रजायते । देवतायतनंकार्य्यमुद्यानंतेनशक्तितः ॥ १९ ॥ सौगन्धिकस्यहरणाद् दुर्गन्धाङ्गःप्रजायते । सलक्षमेकंपद्मानां जुहुयाज्जातवेदसि ॥ २० ॥ दारुहारीचपुरुषः खिन्नपाणिःप्रजायते । सदद्याद्विदुषेशुद्धौ काश्मीरजपलद्वयम् ॥ २१ ॥ विद्यापुस्तकहारीच किलमूकःप्रजायते । न्यायेतिहाससंध्यात्स ब्राह्मणायसदक्षिणम् ॥ २२ ॥ वस्त्रहारीभवेत्कुष्ठी संप्रदद्यात्प्रजापतिम् । हेमनिष्कमितंचैव वस्त्रयुग्मंद्विजातये ॥ २३ ॥ ऊर्णीहारीलोमशःस्यात् सदद्यात्कंबलान्वितम् । स्वर्णनिष्कमितंहेम वह्निंदद्याद्विजातये ॥ २४ ॥ पट्टसूत्रस्यहरणान्निर्लोमाजायतेनरः ।
नील मणि दक्षिणा में देवे ॥ १८ ॥ कन्द तथा मूलों के चुराने पर छोटे २ हाथों वाला होता है उसको यथाशक्ति देव मन्दिर और बगीचा लगवाना चाहिये ॥ १९ ॥ सुगन्धि की चोरी करने से दुर्गन्ध अङ्गों से युक्त होता है । वह एक लाख कमलों का अग्नि में होम करे ॥ २० ॥ काष्ठ की चोरी करनेवाले के हाथों में खेद हुआ करता है वह विद्वान् को आठ तोला मणिका हीर।दिका दान करे ॥ २१ ॥ विद्या के पुस्तक को चुरानेवाला निश्चयकर मूक (गूंगा) होता है वह न्याय और इतिहास के पुस्तकों का दक्षिणा सहित दान करे ॥ २२ ॥ वस्त्र चुरानेवाला कुष्ठरोगी होता है वह चार तोला सुवर्ण से प्रजापति की प्रतिमा बनाकर दो वस्त्रों सहित ब्राह्मण को दान करे ॥ २३ ॥ ऊन चुरानेवाला शरीर पर बहुत रोम युक्त होता है वह चार तोले सुवर्ण से अग्नि देवता की प्रतिमा बनाकर एक कम्बल सहित ब्राह्मण को दान देवे ॥ २४ ॥ रेशम का वस्त्र चुराने से मनुष्य सर्वथा लोमों से रहित होता है वह अपनी शुद्धि के