अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 682, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें३६ शातातपस्मृतिः ॥
भृगुणामेदिनीचौरो वह्निनायज्ञहानिकृत् ॥ १३ ॥ दवेनदक्षिणाचोरः शस्त्रेणश्रुतिनिन्दकः । अश्मनाद्विजनिन्दाकृद्विषेणकुमतिप्रदः ॥ १४ ॥ उद्वन्धनेनहिंस्रःस्यात् सेतुभेदीजलेनतु । द्रुमेणराजदन्तहृदतिसारेणलोहहृत् ॥ १५ ॥ गोग्रासहृद्विषूचिकया कवलेनद्विजात्रहृत् । भ्रामेणराजपत्नीहृदतिसारेणनिष्क्रियः ॥ १६ ॥ शाकिन्याद्यैश्चम्रियते स्वदर्पात्कार्यकारकः । अनध्यायेप्यधीयानो म्रियतेविद्युतातथा ॥ १७ ॥ अस्पृश्योऽस्पृश्यसंगीच वान्तमाश्रित्यशास्त्रहृत् । पतितोऽपत्यविक्रेताऽनपत्योद्विजवस्त्रहृत् ॥ १८ ॥ विक्रेताघातकश्चैव द्वावेतौतुल्यवृत्तौ । घातकश्चैवहत्यायां राज्ञांरोषाच्चविक्रयी ॥ १९ ॥ अथतेषांक्रमेणैव प्रायश्चित्तं विधीयते ।
वा विघ्न करने वाला -अग्नि में जल कर मरता है ॥१३॥ दक्षिणा चुरानेवाला- दावाग्नि से, वेदनिन्दक-शस्त्र से, ब्राह्मणनिन्दक-पत्थर से, और बुरे काम को सिखाने वाला विष से मारा जाता है ॥ १४ ॥ हिंसक-फांसी से, बांध तो- ड़ने वाला-जल में डूब के, हाथीदांत का चुराने वाला-वृक्ष से गिर के, और लोहे के बर्तनों का चोर-दस्त होने द्वारा मरता है ॥१५॥ गौ का ग्रास (पहिली रोटी) खाने वाला-विषूचिका (हैज़ा) से, ब्राह्मणार्थ समर्पित भोजन वा अन्न को मारलेने वाला-ग्रास अटकने से, राजपत्नी को भगा ले जाने वाला -भ्रमरोग से, और निकम्मा-अतीसार (दस्तों के) रोग से मरता है ॥ १६ ॥ अपने दर्प से काम करने वाला शाकिनी आदि लगने से मरता, अनध्याय के दिन वेद पढ़ने वाला विद्युत् गिरने से मरता है ॥ १७ ॥ स्पर्श न करने योग्य का संगी-अस्पृश्य (मलमूत्रादि से लिप्त) दशामें, शास्त्र को चुराने वाला-प- तित होके, और ब्राह्मण के वस्त्र' चुराने वाला- निर्वंशी सन्तान हीन होकर मरता है ॥ १८ ॥ सन्तान बेंचने और मार डालने वाला दोनों तुल्य अपराधी हैं। घातक तो हत्या में और बेंचने वाला सन्तान त्यानी धनको भोगताहुआ सन्तान को ही भोगता है ॥ १९ ॥ अब इन थोड़े अर्थह से मरने वालों के