अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 734, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें४४ वसिष्ठस्मृतिः ॥
पितापितामहश्चैव तथैवप्रपितामहः ।
उपासतेसुतंजातं शकुन्ताइवपिप्पलम् ॥ ३६ ॥
मधुमांसैश्चशाकैश्च पयसापायसेनवा ।
एषनोदास्यतिश्राद्धं वर्षासुचमघासुच ॥ ३७ ॥
संतानवर्द्धनं पुत्र मुद्यतं पितृकर्मणि ।
देवब्राह्मणसंपन्नमभिनन्दन्तिपूर्वजाः ॥ ३८ ॥
नन्दन्तिपितरस्तस्य सुवृष्टैरिवकर्षकाः ।
यद्गयास्थोददात्यन्नं पितरस्तेनपुत्रिणः ॥ ३६ ॥
श्रावण्याग्रहायण्योरन्वष्टक्यां च पितृभ्यो दद्याद्
द्रव्यदेशब्राह्मणसन्निधाने वा, न कालनियमः ॥४०॥ अवश्यं च
पिता पितामह और प्रपितामह ये तीनों उत्पन्न हुए पुत्र के शरीर पर रहते हुए ऐसे ही वाट देखते हैं कि जैसे पीपल आदि वृक्षों पर रहते हुए पक्षी लगने वाले फलों की आशा रखते हैं ॥३६॥ कि सहत, मांस, शाक, दूध, खीर, वा खोया से यह सन्तान हमारे लिये पिण्ड देगा श्राद्ध करेगा। और विशेषकर वर्षा ऋतु के मघा नक्षत्र में दिया श्राद्ध विशेष सन्तोष जनक होता है ॥ ३७ ॥ देवता और ब्राह्मण से युक्त, पितरों के श्राद्धकर्म में उद्यत अपने कुल की सन्तति बढ़ाने वाले पुत्र को उनके पूर्वज लोग धन्यवाद देते हैं कि तू कुलतारक कुलदीपक कुल को तारनेवाला है ॥ ३८ ॥ जैसे अच्छी वर्षा होने से किसान लोग प्रसन्न ...न होते वैसे उस सुपुत्र के पितर लोग आनन्द मानते हैं । जो गया क्षेत्र ...कर पितृश्राद्ध करता है पितर लोग उससे अपने को पुत्रवाला मानते ... ॥ ३९ ॥ श्रावण तथा मार्ग शीर्ष महिने की पौर्णमासी, माघ कृष्ण पक्ष की तिथि वा आठ अन्वष्टका में पितरों का श्राद्ध करे । अथवा जब कभी श्राद्ध के यो-ग्य शास्त्रोक्त उत्तम स्थान और सुपात्र ब्राह्मण प्राप्त हों तभी श्राद्ध करे काल का नियम होने पर भी साधनों की ठीक २ प्राप्ति ही उत्तम कक्षा के श्राद्ध का ... है । इस कारण काल नियम से साधन संचय बलवान् है ॥ ४० ॥ ब्राह्मणा... अग्नियों का विधिपूर्वक स्थापन अवश्यमेव करे । दर्शेटि, पौर्ण-मासेष्टि, आग्रयण ( नवान्नेष्टि ) वैश्वदेवपर्व-वरुणप्रघासपर्व-साकमेधपर्व-