अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 736, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ें४६ वसिष्ठस्मृतिः ॥
यस्य, गव्यं बस्ताजिनं वा वैश्यस्य ॥ ४८ ॥ शुक्लमहतं वासो ब्राह्मणस्य, माञ्जिष्ठं क्षत्रियस्य, हारिद्रं कौशेयं वैश्यस्य, सर्वे- षां वा तान्तवमरक्तम् ॥ ४९ ॥ भवत्पूर्वां ब्राह्मणो भिक्षां याचेत, भवन्मध्यां राजन्यो, भवदन्त्यां वैश्यः ॥ ५० ॥ आ- षोडशाद्ब्राह्मणस्य नातीतः कालः ॥ ५१ ॥ आद्वाविंशात्क्ष- त्रियस्य ॥५२॥ आचतुर्विंशाद्वैश्यस्य ॥५३॥ अतऊर्ध्वं पतितसा- वित्रीका भवन्ति ॥ ५४ ॥ नैतानुपनयेन्नाध्यापयेन्न याजये- न्नैभिर्विवाहयेयुः ॥ ५५॥ पतितसावित्रीक उद्दालकव्रतं चरे- त् ॥५६॥ द्वौ मासौ यावकेन वर्तयेत्, मासं पयसा, अर्धमासमा- मिक्षयाऽष्टरात्रं घृतेन, षड्रात्रमयाचितेन, त्रिरात्रमब्भक्षो
में ओढ़ने को देवे ॥४८॥ जो किसी थान में से फाड़ा न हो किन्तु चीरा सहित बिना हुआ सफेद वस्त्र ब्राह्मण का, मंजीठ से रंगा लाल वस्त्र क्षत्रिय का और हल्दी से रंगा पीला रेशमी वस्त्र वैश्य ब्रह्मचारी का हो अथवा तीनों ब्रह्म- चारियों को बिना रंगे कपास के वस्त्र दिये जावें ॥ ४९ ॥ ब्राह्मण ब्रह्मचारी (भवति! भिक्षां देहि) क्षत्रिय (भिक्षां भवति! देहि) और वैश्य ब्रह्मचारी (भि- क्षां देहि भवति!) ऐसा वाक्य बोल कर अपनी २ माता से प्रथम भिक्षा मांगे ॥ ५० ॥ सोलह वर्ष के आयु तक ब्राह्मण के उपनयन संस्कार का काल अतीत नहीं होता ॥५१॥ बाईस वर्षतक क्षत्रिय के संस्कार का काल है ॥५२॥ और चौबीस वर्ष तक वैश्य के संस्कार का समय है ॥ ५३ ॥ इस से उपरान्त तीनों ही अपने २ सावित्री गुरुमन्त्र से पतित हो जाते हैं ॥ ५४ ॥ तब उन पतित हुए ब्राह्मणादि का न यज्ञोपवीत संस्कार करावे, न वेद पढ़ावे, न यज्ञ करावे और न उन के साथ कन्या का विवाह करे ॥ ५५ ॥ वह पतित सावि- त्रीक ब्राह्मणादि पुरुष निम्न रीति से उद्दालक व्रत करे ॥५६॥ प्रथम दो महिने तक आठ ग्रास कुलत्थ खाताहुआ एकान्त में रहे। एक मास तक दूध से रहे पन्द्रह दिन तक आमिक्षा (गर्म दूधमें दही डालने से फटा दूध) से, आठ दिन गौ के घृत से, छः दिन तक बिन मांगे जो मिले उस से, तीनदिन तक जलमात्र पीकर और एक दिनरात निर्जल उपवास करे । इसप्रकार चार महीने तथा