भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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५८ वसिष्ठस्मृतिः ॥

मार्जारमुखसंस्पृष्टं शुचिरेवहितद्भवेत् ॥ २३ ॥
अन्नं पर्युषितं भावदुष्टं सकृल्लेखं पुनःसिद्धमाममांसं पक्वं च कामं तु दध्ना घृतेनाभिघारितमुपयुञ्जीत ॥ २४ ॥ अपि-
ह्यत्र प्राजापत्यान् श्लोकानुदाहरन्ति ॥ २५ ॥
हस्तदत्तास्तुयेस्नेहा लवणव्यञ्जनानि च ।
दातारंनोपतिष्ठन्ति भोक्ताभुङ्क्तेचकिल्विषम् ॥ २६ ॥
प्रदद्यान्नतुहस्तेन नाऽऽयासेनकदाचन, इति ॥ २७ ॥
लशुनपलाण्डुकवकगृञ्जनश्लेष्मातकवृक्षनिर्या सलोहितव्रश्चनश्वकाकावलीढशूद्रोच्छिष्टभोजनेषु कृच्छ्रातिकृच्छ्रइतरेष्व-
न्यत्र मधुमांसफलविकर्षेष्वग्राम्यपशुविषयः ॥२८॥ संधिनी-
क्षीरमवत्साक्षीरं गोमहिष्याजानामनिर्दशाहानमन्तर्नाव्यु-


मुख भोज्यान्न में लग गया होतो वह अन्न शुद्ध ही है ॥ २३ ॥ बासी पहिले दिन का धरा हुआ, जिस में ग्लानि वा शंका हो गयी हो, एक बार किसी जान वरने पंजा मार दिया हो, फिर से पकाया, कच्चा मांस, वा पकाया मांस ये सब अभक्ष्य हैं । परन्तु बासे घरे हुये अन्नादि को दही वा घी से संस्कार करके भले ही खालेवे ॥ २४ ॥ और भी यहां प्रजापति के श्लोक उदाहरण में कहते हैं कि ॥२५॥ घी आदि स्नेह, लवण और दही आदि व्यञ्जन ये सब हाथ पर दिये जांय तो देने वाले को दुर्लभ हो जाते और इन को खाने वाला पाप को खाता है अर्थात् भोजन करते हुये को लवण घृतादि हाथ पर नहीं देने चाहिये किन्तु पात्र वा पत्तल पर धर देवें ॥२६॥ और देने वाला भी उक्त पदार्थों को हाथ से न देवे और लोभ में आकर कष्ट मानता हुआ भी कदापि दान न देवे ॥२७॥ लहसन, प्याज, कठफून, गाजर, शलगम, लसोढ़ा, (लभेडा) वृक्षों का गोंद, लाल गोंद, वृक्षों के गोदने से निकला रस वा दूध, कुत्ते कौवे का चाटा हुआ अन्नादि, और शूद्र का उच्छिष्ट इन सब को खालेने पर कृच्छ्रातिकृच्छ्र व्रत करे तथा शहद मांस और जिन से फलों की हानि हो ऐसे वृक्षों के फूल वा कली आदि को छोड़ के अन्य अभक्ष्यों में भी यही कृच्छ्रातिकृच्छ्र व्रत जानो और वह मांस ग्राम के पशुओं से भिन्न जंगल का जानों ॥ २८ ॥ गाभिन गौ का, जिस का बच्छा मर गया हो, सद्या गौ भैंसि बकरी का व्याने पर दश दिन के भीतर का दूध, नौका का जल, ये सब अभक्ष्य हैं । पुन्ना,