भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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भाषार्थसहिता ॥ ५९

दकमपूपधानाकरम्भसक्तुवटकतैलपायसशाकानि शुक्तानि वर्जयेत्, अन्यांश्च क्षीरयवपिष्टविकारान् ॥ २९ ॥ श्वावि- च्छलुकशशकच्छपगोधाः पञ्चनखानां भक्ष्याः ॥३०॥ अनुष्ट्राः पशूनामन्यतोदतश्च मत्स्यानां वा चेटगवयशिशुमारनक्रकु- लीरा विकृतरूपाः ॥ ३१ ॥ सर्पशीर्षांश्च ॥ ३२ ॥ गौरगवयशर भांश्चानुद्दिष्टाः ॥ ३३ ॥ तथा धेन्वनडुहौ मेध्यौ वाजसनेयके विज्ञायेते ॥ ३४ ॥ खड्गे तु विवदन्त्यग्राम्यशूकरे च ॥ ३५ ॥ शकुनानां च विष्किर्वाविष्किरजालपादाः ॥ ३६ ॥ कलविङ्क- प्लवहंसचक्रवाकभासवायसपारावतकुक्कुटसारङ्गपाण्डुकपो- तकौञ्चक्रकरगृध्रश्येनबकबलाकमद्गुटिट्टिभमान्धातृनक्तं

भुंजे पकाये जौ, दही में मिले सत्तू, केवल सत्तू, तेल के बड़े, पायस-खीर, और पकाये शाक ये सब धरे रहने से खटाय जाने पर अभक्ष्य हैं । तथा दूध, जौ और पिट्ठी के अन्य विकार भी खटाये हुए अभक्ष्य हैं ॥ २९ ॥ पांच नख वाले जीवों में श्वावित्, शल्लक, (दो प्रकार की सेही उन के अवान्तर भेद में दो अवान्तर जाति हैं ) शश, कच्छप, और गोधा ( गोह ) ये पांच भक्ष्य हैं ( यह परिसंख्या विधि राग से सर्वत्र प्राप्त मांस भक्षण के अन्यों में परिवर्जनार्थ है । अर्थात् हिंसाजनक होने से सभी मांस भक्षण त्याज्य है यदि सब का त्याग जो कोई न कर सके तो पांच पञ्चनख वालों में प्रवृत्ति रहने मे कम दोष लगेगा अर्थात् निर्दोष फिर भी न होगा ) ॥ ३० ॥ ऊंट को छोड़ के एक ओर दांतों वाले, चेट, गवय, शिशुमार, नाका, कुलीर इन नामों वाले विकृत भयंकर रूप धारी, ॥ ३१ ॥ सांप के जैसे शिर वाले ये चेट आदि नामक जल जन्तु परिसंख्या विधि से भक्ष्य हैं ॥३२॥ गौर मृग, गवय (नीलगाय) और शरभ नामक जङ्गल के जीव भक्ष्यों में उद्दिष्ट नहीं हैं ॥ ३३ ॥ गौ बैल मेध्य नाम मेधा के अनुकूल हैं ऐसा वाजसनेय श्रुति से जाना जाता है ॥३४॥ गेंडा और बन के सुअर के भक्ष्य होने न होने में विवाद करते हैं ॥ ३५ ॥ पक्षियों में विष्किवि, विष्किर, जालपाद् नामक पक्षी भी अभक्ष्य हैं ॥ ३६ ॥ कलविङ्क, प्लव, हंस, चक्रवाक, भास, कौवा, परेवा, मुर्गा, सारङ्ग, श्वेतकबूतर, क्रौञ्च, क्रकर, गीध, श्येन, बगुला, बलाका, मद्गु, टिट्टिहिया, मान्धाता, चमगीदर,