अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)
Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)
महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा
स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)
पृष्ठ 777, कुल 805 में से
संदर्भ में पढ़ेंभाषार्थसहिता ॥ ८९
शरीरपरितापेन तपसाध्ययनेन च ।
मुच्यतेपापकृत्पापाद्दानाच्चापिप्रमुच्यते, इति
विज्ञायते, इति विज्ञायते ॥ ५२ ॥
इति वासिष्ठे धर्मशास्त्रे विंशतितमोऽध्यायः ॥२०॥
शूद्रश्चेद् ब्राह्मणीमभिगच्छेद्वीरणैर्वेष्टयित्वा शूद्रमग्नौ प्रास्येत् ॥ १॥ ब्राह्मण्याः शिरसि वपनं कारयित्वा सर्पिषा समभ्यज्य नग्नां कृष्णं खरमारोप्य महापथमनुसंव्राजयेत्पूता भवतीति विज्ञायते ॥ २ ॥ वैश्यश्चेद् ब्राह्मणीमभिगच्छेल्लोहितदर्भैर्वेष्टयित्वा वैश्यमग्नौ प्रास्येत् ॥ ३॥ ब्राह्मण्याः शिरसि वपनं कारयित्वा सर्पिषाभ्यज्य नग्नां गौरखरमारोप्य महापथमनुसंव्राजयेत् पूता भवतीति विज्ञायते ॥ ४ ॥ राजन्यश्चेद्ब्राह्मणीमभिगच्छेच्छरपत्रैर्वेष्टयित्वा राजन्यमग्नौ प्रास्येत्, ब्राह्मण्याः शिरोवपनं कारयित्वा सर्पिषासमभ्यज्य नग्नां रक्तं खरमारोप्य महापथमनुसंव्राजयेत् पूता भवतीति
तपाने कष्ट देने रूप तपसे, वेदाध्ययन से और सुपात्रों को दिये दान से पाप करनेवाला पुरुष पाप से छूट जाता है। यह बात श्रुति से जानी जाती है ॥५२॥ यह वासिष्ठ धर्मशास्त्र के भाषानुवाद में बीशवां अध्याय पूरा हुआ ॥ २० ॥
यदि शूद्र ब्राह्मणी से व्यभिचार करे तो राजा उसको गांडर से लपेटकर प्रज्वलित अग्नि में डलवादेवे ॥ १ ॥ और ब्राह्मणी का शिर मुंडा के सब शरीर में घी लगाकर नंगी करके काले गधेपर चढ़वा के बड़ी चौड़ी सड़क से निकाले जिस दशा को सब कोई देखे तो शुद्ध होजाती यह श्रुति से जाना जाता है ॥ २ ॥ यदि वैश्य पुरुष ब्राह्मणी से संग करे तो लाल दाभों से लपेटकर उस वैश्य को प्रज्वलित अग्नि में फेंक देवे ॥ ३ ॥ और ब्राह्मणी का शिर मुंडवा के शरीर में घी लगाकर सफेद गधे पर नंगी चढ़ा के बड़ी सड़क से निकाले तो पवित्र होजाती ऐसा जाना जाता है ॥ ४ ॥ यदि क्षत्रिय पुरुष ब्राह्मणी से व्यभिचार करे तो शरपत्ते से लपेटकर प्रज्वलित अग्नि में डलवा देवे और ब्राह्मणी का शिर मंडवा के शरीर में घी लगाकर नंगी कर लाल गधे पर च-