भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

पृष्ठ 779, कुल 805 में से

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भाषार्थसहिता ॥ ८९

चतस्रस्तु परित्याज्याः शिष्यगागुरुगाचया ॥ ११ ॥
पतिघ्नी च विशेषेण जुङ्गितोपगता च या ॥ १२ ॥
याब्राह्मणीसुरापी नतांदेवाःपतिलोकंनयन्ति ।
इहैवसाचरतिक्षीणपुण्याऽप्सुलुग्भवतिशुक्तिकावा ॥१३॥
ब्राह्मणक्षत्रियविशां स्त्रियःशूद्रेणसंगताः ।
अप्रजाताविशुध्यन्ति प्रायश्चित्तेननेतराः ॥
प्रतिलोमंचरेयुस्ताः कृच्छ्रं चान्द्रायणोत्तरम् ॥ १४ ॥
पतिव्रतानांगृहमेधिनीनां सत्यव्रतानांचशुचिव्रतानाम् ।
तासांतुलोकाःपतिभिःसमाना, गोमायुलोकाव्यभिचारिणीनाम् १५
पतत्यर्धंशरीरस्य यस्यभार्यासुरांपिवेत् ।
पतिताधं शरीरस्य निष्कृतिर्नविधीयते ॥ १६ ॥
ब्राह्मणश्चेदप्रेक्षापूर्वं ब्राह्मणदारानभिगच्छेदन्निवृत्तध-


नियम धर्मों से रहित हो जाता है। तथापि मनुष्य को पुत्र शिष्यों की स्त्री, पितादि गुरुओं की पत्नी, पतिको घात करने वाली और वर्जित नीच के साथ संग करने वाली इन चार प्रकार की स्त्रियों को विशेष कर त्यागना चाहिये परन्तु पाप सब के साथ व्यभिचार करने में है॥ ११ । १२ ॥ जो ब्राह्मणी सुरा (मद्य) पीने वाली होती है उस को देवता लोग पति के साथ स्वर्ग में नहीं घूमने देते। वह पुण्य का नाश हो जाने से इसी मर्त्यलोक में विचरती है। जल में डुबकी लगाने वाली पनिहां वा सीपी होती है ॥ १३ ॥ जिन के कोई सन्तान न हुआ हो ऐसी ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, की स्त्रियां शूद्र से संग करें तो प्रायश्चित्त से शुद्ध हो सकती हैं किन्तु जिन के सन्तान हो चुके वे शुद्ध नहीं हो सकतीं। वे स्त्रियां उलटा कृच्छ्र व्रत करके चान्द्रायण व्रत करें ॥ १४ ॥ शुद्ध पवित्रता से रहने वालीं, सत्य बोलने वालीं, और पतिव्रता होने से घर को पवित्र करने वालीं स्त्रियों को अपने पतियों के सहित स्वर्ग प्राप्त होता, और व्यभिचारिणी स्त्रियों को शृगाल योनि मिलती है ॥ १५ ॥ जिस द्विज की स्त्री मद्य पीती है उस का आधा शरीर पतित हो जाता है और जिस के शरीर का आधा भाग पतित हो गया उस के शुद्ध होने का प्रायश्चित्त नहीं है ॥ १६ ॥ ब्राह्मण पुरुष यदि बिना विचारे किसी ब्राह्मण की स्त्री से

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