भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

DevanagariHindipublished805 पृष्ठ

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९० वसिष्ठस्मृतिः ॥

र्मकर्मणः कृच्छ्रो निवृत्तधर्मकर्मणोऽतिकृच्छ्रः ॥ १७ ॥ एवं राजन्यवैश्ययोः ॥१८॥ गां चेद्दुहन्यात्तस्याश्चर्मणाऽऽर्द्रेण परि- वेष्टितः षण्मासान् कृच्छ्रं तप्तकृच्छ्रं वा तिष्ठेत् ॥१९॥ तयो- र्विधिः ॥ २० ॥ त्र्यहं दिवा भुङ्क्ते नक्तमश्नाति वैत्र्यहम् । त्र्यहमयाचितव्रतस्त्र्यहं न भुङ्क्त इति कृच्छ्रः ॥२१॥ त्र्यहमुष्णं पिबेदापस्त्र्यहमुष्णंपयः पिबेत् । त्र्यहमुष्णंघृतं पीत्वा वायुभक्षःपरंत्र्यहम् ॥२२॥ इति तप्तकृच्छ्रः ॥ २३ ॥ ऋषभवेहतौ च दद्यात् ॥ २४ ॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥ २५ ॥ त्रयएव पुरारोगाईर्ष्या अनशनंजरा । पृषद्धुस्तनयंहत्वा अष्टानवतिमाहरेत्, इति ॥ २६ ॥ श्वमार्जारनकुलसर्पदर्दुरमूषकान् हत्वा कृच्छ्रं द्वादश


संग करे और अपने धर्म कर्म में भी तत्पर रहे तो एक कृच्छ्र व्रत करे । और धर्म का नियम छोड़के वैसा किया हो तो अतिकृच्छ्र व्रत करे ॥ १७ ॥ इसी प्रकार क्षत्रिय तथा वैश्य पुरुष अपने २ वर्ण की स्त्रियों से गमन करें तो भी पूर्वोक्तरीति से ही प्रायश्चित्त जानो ॥१८॥ यदि कोई पुरुष गौ को मारडाले तो उस के गीले चर्म को ओढ़के छः मास तक कृच्छ्र तथा अतिकृच्छ्र व्रत करे ॥ १९ ॥ उन दो व्रतों का विधान यह है कि ॥ २० ॥ तीन दिन तक दिन में, तीन दिन तक रात में, परिमित एकवार भोजन करे । तीन दिन बिना मांगे जो मिले वही एकवार खावै और तीन दिन निराहार उपवास करे यह एक कृच्छ्र व्रत कहाता है ॥ २१ ॥ तीन दिन गर्म जल, तीन दिन गर्म दूध, तीन दिन गर्म घी और तीन दिन वायु मात्र भक्षण करे ॥ २२ ॥ इस बारह दिन के व्रत को तप्तकृच्छ्र कहते हैं ॥ २३ ॥ गर्भवती होने के समय वदाने से जिस का गर्भ गिर जाता हो ऐसी गर्भ को गिराने वाली वेहत् गौ और एक बैल व्रत के अन्त में दक्षिणा देवे ॥ २४ ॥ और भी श्लोक का प्रमाण कहते हैं कि ॥ २५ ॥ तीन रोग पहिले या मुख्य हैं एक ईर्ष्या, २-उपवास, ३-बुढ़ापा । बूंदों का मारने वाला सन्तान को मार कर अट्टानवे लेलेवे ( ? ) ॥ ॥ २६ ॥ कुत्ता, बिल्ली, न्योला, सांप, मेंडक, मूषा, इन को मारकर बारह दिन