भारतकोश
अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

अष्टादश स्मृति संग्रह (संपूर्ण १८ स्मृतियाँ)

Ashtadasha Smriti Sangrah (18 Smritis Complete)

महर्षि व्यास, अत्रि, विष्णु, हारीत, औशनस, आङ्गिरस, यम, आपस्तम्ब, संवर्त, कात्यायन, बृहस्पति, शंख, लिखित, दक्ष, शातातप, वसिष्ठ आदि द्वारा

स्रोत: 18 Smritis with Sanskrit Shlokas & Hindi Bhasha Tika (उद्गम)

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११२ वसिष्ठस्मृतिः ॥

दानाद् गृहलाभः ॥ १३ ॥ गृहप्रदो नगरमाप्नोति ॥ १४ ॥ उपानत्प्रदाता यानमासादयति ॥१५॥ अथाप्युदाहरन्ति ॥१६॥ यत्किंचित्कुरुतेपापं पुरुषोवृत्तिकर्शितः । अपिगोचर्ममात्रेण भूमिदानेनशुध्यति ॥ १७ ॥ विप्रायाऽऽचमनार्थंतु दद्यात्पूर्णकमण्डलुम् । प्रेत्यतृप्तिंपरांप्राप्य सोमपोजायतेपुनः ॥ १८ ॥ अनडुहांसहस्राणां दानानांधुर्यवाहिनाम् । सुपात्रेविधिदत्तानां कन्यादानेनतत्समम् ॥ १९ ॥ त्रीण्याहुरतिदानानि गावःपृथ्वीसरस्वती । आदिदानंहिरण्यानां विद्यादानंततोऽधिकम् ॥ २० ॥ आत्यन्तिकफलप्रदं मोक्षदंबन्धमोचनम् । योगिनांसंमतोविद्वानाचारमनुवर्तते ॥ २१ ॥ श्रद्दधानःशुचिर्दान्तो धारयेच्छृणुयादपि ।


से घर मिलता (घर एक प्रकार का बड़ा छाता जानो) ॥ १३॥ घर देनेवाला नगर का स्वामी होता है ॥ १४ ॥ जूतों का दान करनेवाले को सवारी प्राप्त होती है ॥ १५ ॥ और भी श्लोकों का प्रमाण कहते हैं कि ॥ १६ ॥ जीविका (रोजगार) न मिलने से दुःखित हुआ मनुष्य जो कुछ पाप करता है वह गोचर्म मात्र भूमि के दान से शुद्ध हो जाता है ॥ १७ ॥ आचमन के लिये ब्राह्मण को जो जल से भरा कमण्डलु दान करे वह जन्मान्तर में परम तृप्ति को प्राप्त होकर अग्निष्टोमादि सोमयाग करने वाला होता है ॥ १८ ॥ बलवान् गाड़ी में बोझा ले चलने में समर्थ एक हजार बैलों का दान सुपात्रों को विधिवत् देवे तो कन्यादान के तुल्य पुण्य होता है ॥ १९ ॥

गौ, पृथिवी और विद्या ये तीन दान बड़े हैं । इन में भी सुवर्ण का दान मुख्य है और विद्या का दान सुवर्ण से भी बड़ा है ॥ २० ॥ बन्धन से छुड़ा के मोक्ष देनेवाला होने से विद्या दान अत्यन्त फल देनेवाला है । जो विद्वान् होकर सदाचार पर चलता है वह योगियों का भी मान्य है ॥ २१ ॥ जो धर्म के विचारों को सुने और धारण (स्वीकार) करे आगे वैसा ही करने लगे, मनको