भारतकोश
अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 42

४२ अष्टाध्यायीसूत्रपाठः (यतिबोधसहितः) ९४ उरसोऽण्च। | १२० दूतस्य भागकर्मणी। ९५ हृदयस्य प्रियः। | १२१ रक्षोयातूनां हननी। ९६ बन्धने चर्षौ। | १२२ रेवतीजगतीहविष्याभ्यः ९७ मतजनहलात्करणजल्पकर्षेषु। | प्रशस्ये। ९८ तत्र साधुः। | १२३ असुरस्य स्वम्। ९९ प्रतिजनादिभ्यः खञ्। | १२४ मायायामण्। १०० भक्ताण्णः। | १२५ तद्भानासामुपधानो मन्त्र १०१ परिषदो ण्यः। | इतीष्टकासु लुक्च मतोः। १०२ कथादिभ्यष्ठक्। | १२६ अश्विमानण्। १०३ गुडादिभ्यष्ठञ्। | १२७ वयस्यासु मूर्ध्नो मतुप्। १०४ पथ्यतिथिवसतिस्वपतेर्डञ्। | १२८ मत्वर्थे मासतन्वोः। १०५ सभाया यः। | १२९ मधोर्ज च। १०६ ढश्छन्दसि। | १३० ओजसोऽहनि यत्खौ। १०७ समानतीर्थे वासी। | १३१ वेशोयशआदेर्भगाद् यल्। १०८ समानोदरे शयित ओ | १३२ ख च। चोदात्तः। | १३३ पूर्वैः कृतमिन्यौ च। १०९ सोदराद् यः। | १३४ अद्भिः संस्कृतम्। ११० भवे छन्दसि। | १३५ सहस्रेण सम्मितौ घः। १११ पाथोनदीभ्यां ड्यण्। | १३६ मतौ च। ११२ वेशन्तहिमवद्भ्यामण्। | १३७ सोममर्हति यः। ११३ स्रोतसो विभाषा ड्यड्ढ्यौ। | १३८ मये च। ११४ सगर्भसयूथसनुताद् यन्। | १३९ मधोः। ११५ तुग्राद् घन्। | १४० वसोः समूहे च। ११६ अग्राद् यत्। | १४१ नक्षत्राद् घः। ११७ घच्छौ च। | १४२ सर्वदेवात्तातिल्। ११८ समुद्राभ्राद् घः। | १४३ शिवशमरिष्टस्य करे। ११९ बर्हिषि दत्तम्। | १४४ भावे च।