भारतकोश
अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

अष्टाध्यायी सूत्रपाठ (महर्षि पाणिनि - पदच्छेद एवं यतिबोध सहित सम्पूर्ण ८ अध्याय)

Ashtadhyayi Sutrapatha of Maharshi Panini

महर्षि पाणिनि द्वारा

DevanagariSanskritpublished102 पृष्ठ

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पृष्ठ 61

षष्ठाध्याये द्वितीयः पादः ६१ जरत्यश्लीलदृढरूपा पारे- वडवा तैतिलकद्रूः पण्य- कम्बलो दासीभाराणां च। ४३ चतुर्थी तदर्थे। ४४ अर्थे। ४५ क्ते च। ४६ कर्मधारयेऽनिष्ठा। ४७ अहीने द्वितीया। ४८ तृतीया कर्मणि। ४९ गतिरनन्तरः। ५० तादौ च निति कृत्यतौ। ५१ तवै चान्तश्च युगपत्। ५२ अनिगन्तोऽञ्चतौ वप्रत्यये। ५३ न्यधी च। ५४ ईषदन्यतरस्याम्। ५५ हिरण्यपरिमाणं धने। ५६ प्रथमोऽचिरोपसम्पत्तौ। ५७ कतरकतमौ कर्मधारये। ५८ आर्यो ब्राह्मणकुमारयोः। ५९ राजा च। ६० षष्ठी प्रत्येनसि। ६१ क्ते नित्यार्थे। ६२ ग्रामः शिल्पिनि। ६३ राजा च प्रशंसायाम्। ६४ आदिरुदात्तः। ६५ सप्तमीहारिणौ धर्म्येऽहरणे। ६६ युक्ते च। ६७ विभाषाध्यक्षे। ६८ पापं च शिल्पिनि। ६९ गोत्रान्तेवासिमाणवब्राह्मणेषु क्षेपे। ७० अङ्गानि मैरेये। ७१ भक्ताख्यास्तदर्थेषु। ७२ गोबिडालसिंहसैन्धवेषूपमाने। ७३ अके जीविकार्थे। ७४ प्राचां क्रीडायाम्। ७५ अणि नियुक्ते। ७६ शिल्पिनि चाकृञः। ७७ सञ्ज्ञायां च। ७८ गोतन्तियवं पाले। ७९ णिनि। ८० उपमानं शब्दार्थप्रकृतावेव। ८१ युक्तारोह्यादयश्च। ८२ दीर्घकाशतुषभ्राष्ट्रवटं जे। ८३ अन्त्यात्पूर्वं बह्वचः। ८४ ग्रामेऽनिवसन्तः। ८५ घोषादिषु च। ८६ छात्रादयः शालायाम्। ८७ प्रस्थेऽवृद्धमकर्क्यादीनाम्। ८८ मालादीनां च। ८९ अमहन्नवं नगरेऽनुदीचाम्। ९० अर्मे चावर्णं द्व्यच्त्र्यच्। ९१ न भूताधिकसञ्जीवमद्राश्म- कज्जलम्।