भारतकोश
अष्टाङ्गहृदयम्

अष्टाङ्गहृदयम्

Ashtanga Hridayam

श्रीमद्वाग्भट द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान - निर्मला हिन्दी व्याख्या (डॉ० ब्रह्मानन्द त्रिपाठी) · चौखम्बा संस्कृत प्रतिष्ठान, दिल्ली · 1999 (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished387 पृष्ठ

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विषयपृष्ठांकविषयपृष्ठांक
आम का वर्णन१८८स्थूलता से कृशता श्रेष्ठ१९५
आमसम्बन्धी मतान्तर१८८कृशता, स्थूलता-चिकित्सा१९५
सामदोष एवं सामरोग१८८कृशता चिकित्सा१९६
सामदोषों की चिकित्सा१८८मांस की महत्ता१९६
दोषनिर्हरण-विधि१८८स्थूलता-कृशता की चिकित्सा१९६
आसन्न दोष का निर्हरण१८९( १५ ) शोधनादिगणसंग्रहार्धध्यायः
दोषनिर्हरण-निर्देश१८९वमनकारक द्रव्य१९७
दोषनिर्हरण-विवेक१८९विरेचनकारक द्रव्य१९७
शोधन का काल१८९निर्हृणोपयोगी द्रव्य१९८
सहेतुक शोधनकाल१८९शिरोविरेचनोपयोगी द्रव्य१९८
शोधन का दृष्टिकोण१८९वातनाशक द्रव्य१९८
शोधन की विशिष्ट विधि१८९पित्तनाशक द्रव्य१९८
औषधसेवन के १० काल१९०कफनाशक द्रव्य१९८
रोगानुसार औषध-सेवनकाल१९०जीवनीय गण१९८
( १४ ) द्विविधोपक्रमणीयाध्यायःविदार्यादि गण१९८
चिकित्सा के दो भेद१९१सारिवादि गण१९९
सन्तर्पण तथा अपतर्पण१९१पद्माकादि गण१९९
तत्त्वों की प्रधानता१९१पुरुषकादि गण१९९
स्नेहन आदि का वर्णन१९१अञ्जनादि गण१९९
प्रत्येक के दो भेद१९१पटोलादि गण१९९
शोधन कर्म एवं उसके भेद१९२गुड्डुच्चादि गण१९९
शमन के लक्षण एवं उसके भेद१९२आररब्धादि गण१९९
बृंहण के लक्षण१९२असनादि गण२००
सन्तर्पण योग्य रोग-रोगी१९२वर्हणादि गण२००
सन्तर्पण-चिकित्सा के उपादान१९२ऊष्कादि गण२००
अपतर्पण योग्य रोग-रोगी१९२वौरतर्वादि गण२००
शोधन, शमन के योग्य रोग-रोगी१९३रोध्नादि गण२००
सन्तर्पण का निषेध१९३अर्कादि गण२००
अपतर्पण-निर्देश१९३सुरसादि गण२०१
सन्तर्पण के लाभ१९३मुष्ककादि गण२०१
अपतर्पण के लाभ१९४वत्सकादि गण२०१
योग, अतियोग, हीनयोग१९४वचादि गण२०१
उनके लक्षण१९४हरिद्रादि गण२०१
अतिस्थूलता आदि रोग१९४प्रियङ्गन्वादि गण२०१
चिकित्सासूत्र१९४अम्बच्छादि गण२०२
विशेष चिकित्सा१९४मुस्तादि गण२०२
विडंग्गादि योग१९४न्यग्रोधादि गण२०२
व्योषादियोग की फलश्रुति१९५एलादि गण२०२
कृशता आदि रोग१९५श्यामादि गण२०२