भारतकोश
अष्टावक्र गीता

अष्टावक्र गीता

Ashtavakra Gita

महर्षि अष्टावक्र द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished405 पृष्ठ

पृष्ठ 189, कुल 405 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 189

१८२ अष्टावक्र-गीता भा० टी० स०

अपनी सत्ता से शून्य हैं, ब्रह्म की सत्ता करके सत्यवत् भान होता है, वास्तव में मिथ्या है वही पुरुष शान्ति को प्राप्त हो जाता है ॥ ८ ॥

इति श्रीअष्टावक्रगीतायां एकादश प्रकरणं समाप्तम् ॥

—:०:—