भारतकोश
अष्टावक्र गीता

अष्टावक्र गीता

Ashtavakra Gita

महर्षि अष्टावक्र द्वारा

स्रोत: Gita Press Gorakhpur · Gita Press Gorakhpur (उद्गम)

DevanagariHindipublished405 पृष्ठ

पृष्ठ 190, कुल 405 में से

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पृष्ठ 190

बारहवाँ प्रकरण ।

—:०:—

मूलम् ।

कायकृत्यासहः पूर्वं ततो वाग्विस्तरासहः ।
अथ चिन्तासहस्तस्मादेवमेवाहमास्थितः ॥ १ ॥

पदच्छेदः ।

कायकृत्यासहः, पूर्वम्, ततः, वाग्विस्तरासहः, अथ, चिन्तासहः, तस्मात्, एवम्, आस्थितः ॥


अन्वयः ।शब्दार्थ ।अन्वयः ।शब्दार्थ ।
पूर्वम् =पहलेअथ =उसके पीछे
कायकृत्यासहः =शारीरिक कर्म का न सहारने- वाला हुआ अर्थात् कायिक कर्म का त्यागनेवाला हुआचिन्तासहः =चिन्ता के व्या- पार को न सहारनेवाला हुआ अर्थात् मानसिक कर्म का त्याग करने- वाला हुआ
ततः =उसके पीछेतस्मात् एवम् =इसी कारण
वाग्विस्तरासहः =वाणी के जप्य- रूप कर्म का न सहारनेवाला हुआ अर्थात् वाचिक कर्म का त्यागनेवाला हुआअहम् एव =मैं ही
आस्थितः =स्थित हूँ