आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

आश्वलायन गृह्यसूत्र (अनाविला टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)
Ashvalayana Grihyasutra Hindi
महर्षि आश्वलायन (टीकाकार: हरदत्त आचार्य) द्वारा
स्रोत: Asvalayana Grihya Sutram with Anavila Commentary by Haradatta (उद्गम)
DevanagariHindipublished292 पृष्ठ
पृष्ठ 31, कुल 292 में से
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| सूत्रम्. | विषयः. |
|---|---|
| ५. | अग्नेः पश्चाद्भागे पलाशदिभिरलङ्कृतायां शय्यायामुपविश्य जपित्वा भार्यापुत्रादिभिः सह प्राक्शिरस उदङ्मुखत्वेन संवेशनम्। |
| ६. | यथावकाशमितरेषां संवेशनम्। |
| ७. | गृहिणः समीपे ज्येष्ठस्य तदनन्तरं तत्कनिष्ठस्येति वा संवेशनक्रमः। |
| ८. | मन्त्रविदां सौर्यस्वस्त्ययनादिमन्त्रजपः। |
| ९. | शयनादुत्थाय प्रतिदिशं सकृन्मन्त्रजपः। |
| १०. | चतुर्थसंहानात् परं सौर्यादिजपो ब्राह्मणभोजनं स्वस्तिवाचनं च। |
चतुर्थः खण्डः।
| सूत्रम् | विषयः |
|---|---|
| १. | हेमन्तशिशिरयोः कृष्णाष्टमीषु चतसृष्वष्टकाकरणम्। |
| २. | एकस्यां वाष्टम्यामष्टका। |
| ३. | पूर्वेद्युः सप्तम्यां पितृभ्यो दानम्। |
| ४. | ओदनकृसरपायसैश्चतुःशरावपारिमिततण्डुलकृतापूपैर्वा होमः। |
| ५. | पशुना स्थालीपाकेन वाष्टकाकरणम्। |
| ६. | उभयोरसम्भवे बलीवर्दस्य यवसमुष्टिप्रदानम्। |
| ७. | त्रयस्यासम्भवेऽग्निना कक्षदाहः। |
| ८. | यवसदाने कक्षदहने चैषा मेऽष्टकेति मनसा ध्यानम्। |
| ९. | उक्तैः कल्पैः शास्त्रान्तराविहितैर्वाष्टकाया अवश्यकर्तव्यत्वम्। |
| १०. | अस्या अष्टकाया एकेषां मते देवता विश्वेदेवाः। |
| ११. | आग्नेयी वा। |
| १२. | सौर्या वा। |
| १३. | नक्षत्राणि वा। |
| १४. | रात्रिर्वा। |
| १५. | ऋतवो वा। |