अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 100, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंत्वमीशिषे पशूनां पार्थिवानां ये जाता उत वा ये जनित्राः. मेमं प्राणो हासीन्मो अपानो मेमं मित्रा वधिषुर्भो अमित्राः.. (३) हे अग्नि देव! पृथ्वी पर जो पशु उत्पन्न हो चुके हैं और जो उत्पन्न होने वाले हैं, तुम उन के स्वामी हो. प्राण और अपान वायु इस बालक का त्याग न करें. मित्र एवं शत्रु इस का वध न करें. (३) द्यौष्ट्वा पिता पृथिवी माता जरामृत्युं कृणुतां संविदाने. यथा जीवा अदितेरुपस्थे प्राणापानाभ्यां गुपितः शतं हिमाः.. (४) हे बालक! द्यौ तेरा पिता और पृथ्वी तेरी माता है. ये दोनों एकमत हो कर तुझे दीर्घ आयु प्रदान करें, जिस से तू पृथ्वी की गोद में प्राण और अपान वायु से सुरक्षित हो कर सौ वर्ष तक जीवित रहे. (४) इममग्न आयुषे वर्चसे नय प्रियं रेतो वरुण मित्र राजन्. मातेवास्मा अदिते शर्म यच्छ विश्वे देवा जरदष्टिर्यथासत्.. (५) हे अग्नि देव! इस बालक को दीर्घ जीवन प्रदान करो एवं तेजस्वी बनाओ. हे तेजस्वी वरुण एवं मित्र देव! इसे पुत्र उत्पन्न करने योग्य वीर्य प्रदान करो. हे अदिति! तुम माता के समान इस बालक को सुख प्रदान करो. हे समस्त देवो! यह ऐसा हो कि इस का शरीर वृद्धावस्था को प्राप्त करे. (५) सूक्त-२९ देवता—अग्नि, सूर्य आदि पार्थिवस्य रसे देवा भगस्य तन्वो ३ बले. आयुष्यमस्मा अग्निः सूर्यो वर्च आ धाद् बृहस्पतिः.. (१) पृथ्वी संबंधी पदार्थों के रस को पीने वाले पुरुष को इंद्र आदि देव भग देवता के समान बली बनाएं. सूर्य इस पुरुष को दीर्घ आयु प्रदान करें. सब के प्रेरक आदित्य एवं बृहस्पति इसे तेज प्रदान करें. (१) आयुरस्मै धेहि जातवेदः प्रजां त्वष्टरधिनिधेह्यस्मै. रायस्पोषं सवितरा सुवास्मै शतं जीवाति शरदस्तवायम्.. (२) हे जातवेद अग्नि! इसे सौ वर्ष की दीर्घ आयु प्रदान करो. हे त्वष्टा देव! इस के लिए अधिक संतान स्थापित करो. हे सब के प्रेरक सविता देव! इस के लिए धन की अधिकता को प्रेरित करो. आप सब का यह पुत्र सौ वर्ष तक जीवित रहे. (२) आशीर्ण ऊर्जमुत सौप्रजास्त्वं दक्षं धत्तं द्रविणं सचेतसौ. जयं क्षेत्राणि सहसायमिन्द्र कृण्वानो अन्यानधरान्तसत्पनान्.. (३) ebook converter DEMO Watermarks*