भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

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यन्नासत्या पराके अर्वाके अस्ति भेषजम्. तेन नूनं विमदाय प्रचेतसा छर्दिर्वत्साय यच्छतम्.. (५) हे अश्विनीकुमारो! दूर की अथवा समीप की ओषधि को अपने दंभी मन के द्वारा हमें विशेष शक्ति के लिए प्रदान करो तथा हमारे शिशु के लिए घर दो. (५) सूक्त-१४२ देवता—अश्विनीकुमार अभुत्स्यु प्र देव्या साकं वाचाहमश्विनोः. व्यावर्दैव्या मतिं वि रातिं मर्त्येभ्यः.. (१) मैं अपनेआप को अश्विनीकुमारों की ज्ञान वृद्धि के साथ रहने वाला मानता हूं. तुम मेरी बुद्धि को प्रकाशित करो तथा मनुष्यों के लिए धन दो. (१) प्र बोधयोषो अश्विना प्र देवि सूनृते महि. प्र यज्ञहोतरानुषक् प्र मदाय श्रवो बृहत्.. (२) हे स्तोताओ! तुम प्रातःकाल अश्विनीकुमारों को जगाओ. हे सत्यरूप देवो! तुम स्तोताओं को प्रशंसनीय बनाओ. हे होता! तुम अश्विनीकुमारों के यश को सभी ओर फैलाओ. (२) यदुषो यासि भानुना सं सूर्येण रोचसे. आ हायमश्विनो रथो वर्तिया॑ति नृपाय्यम्.. (३) हे अश्विनीकुमारों के रथ! तू अपने तेज से उषा के साथ मिलता हुआ सूर्य के साथ दमकता है. वह रथ अश्वों के द्वारा मार्ग पर जाता है. (३) यदापीतासो अंशवो गावो न दुह ऊधभिः. यद्वा वाणीरनूषत प्र देवयन्तो अश्विना.. (४) जब रश्मियां जल पीने वाली गायों के समान होती हैं, तब गायों के ऐनों से दूध काढ़ा जाता है. हे अश्विनीकुमारो! उस समय ऋषियों की वाणी तुम्हारी स्तुति करती है. (४) प्र द्युम्नाय प्र शवसे प्र नृषाह्याय शर्मणे. प्र दक्षाय प्रचेतसा.. (५) हे अश्विनीकुमारो! मैं अपनी सुंदर बुद्धि के द्वारा तुम्हारी स्तुति इसलिए करता हूं कि मैं मनुष्यों को वश में करने वाला महान बल और कल्याण प्राप्त कर सकूं. (५) यन्नूनं धीभिरश्विना पितुर्योना निषीदथः. यद्वा सुम्नेभिरुक्य्था.. (६) हे अश्विनीकुमारो! तुम अपनी बुद्धि के द्वारा अपने पालनकर्ता के समीप विराजमान ebook converter DEMO Watermarks*