भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 1062, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 1062

होते हो. तुम कल्याणकारी प्रशंसा के पात्र हो. (६) सूक्त-१४३ देवता—अश्विनीकुमार तं वां रथं वयमद्या हुवेम पृथुज्रयम्श्विना संगतिं गोः. यः सूर्यां वहति वन्धुरायुर्र्गिर्वाहसं पुरुतमं वसूयुम्.. (१) हे अश्विनीकुमारो! आज हम तुम्हारे वेगवान रथ का आह्वान करते हैं. तुम्हारा वह रथ ऊंचेनीचे स्थानों में जाता हुआ सूर्या को वहन करता है. वह रथ वाणी को वहन करने वाला, वसुओं को प्राप्त करने वाला तथा गायों से सुसंगत है. मैं उसी रथ को बुलाता हूं. (१) युवं श्रियमश्विना देवता तां दिवो नपाता वनथः शचीभिः. युवोर्र्वपुरभि पृक्षः सचन्ते वहन्ति यत् ककुहासो रथे वाम्.. (२) हे अश्विनीकुमारो! तुम लक्ष्मी के अधिष्ठाता देव हो. तुम उस का सेवन अपनी शक्तियों के द्वारा करते हो तथा उसे आकाश से नीचे नहीं गिरने देते. रथ में तुम्हें वहन करने वाले विशाल घोड़े तथा अन्न तुम्हारे शरीर से सदा मिले रहते हैं. (२) को वामद्या करते रातहव्य ऊतये वा सुतपेयाय वार्कैः. ऋतस्य वा वनुषे पूर्य्याय नमो येमानो अश्विना ववर्तत्.. (३) कौन सा हवि दाता रक्षा पाने के लिए तथा तैयार किया हुआ सोमरस पीने के लिए तुम्हें बुला रहा है. कौन तुम्हारी सेवा कर रहा है. यज्ञ की सेवा करने वाले इंद्र को नमस्कार है. अश्विनीकुमारों को यहां लाने वाले रथ को मैं नमस्कार करता हूं. (३) हिरण्ययेन पुरुभू रथेनेमं यज्ञं नासत्योप यातम्. पिबाथ इन्मधुनः सोम्यस्य दधथो रत्नं विधते जनाय.. (४) हे अश्विनीकुमारो! तुम सोने के बने हुए अपने रथ के द्वारा इस यज्ञशाला में आओ. तुम मधुर सोमरस पीते हुए इस सेवक पुरुष को रत्न और धन प्रदान करो. (४) आ नो यातं दिवो अच्छा पृथिव्या हिरण्ययेन सुवृता रथेन. मा वामन्ये नि यमन् देवयन्तः सं यद् ददे नाभिः पूर्व्या वाम्.. (५) हे अश्विनीकुमारो! तुम सोने के बने हुए अपने रथ के द्वारा आकाश से पृथ्वी पर आओ. अग्निपूजक तुम्हें न रोक सके. मैं तुम्हारे लिए स्तुति करता हूं. (५) नू नो रयिं पुरुवीरं बृहन्तं दस्रा मिमाथामुभयेष्वस्मे. नरो यद् वामश्विना स्तोममावन्त्सधस्तुतिमाजमीळ्हासो अग्मन्.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*