भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 108, कुल 1063 में से

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वर हमें प्राप्त हो तथा सौभाग्य के कारण हमारी इस कुमारी को वर प्राप्त हो, यह कुमारी समान हृदय वाले वर को पा कर स्वयं प्रसन्न हो और उसे भी प्रसन्न करे. पति के साथ निवास स्थान इस के लिए सौभाग्यदायक हो. (१) सोमजुष्टं ब्रह्मजुष्टमर्यम्णा संभृतं भगम्. धातुर्देवस्य सत्येन कृणोमि पतिवेदनम्.. (२) सोमदेव के द्वारा सेवित, ब्रह्म से अथवा गंधर्व से युक्त, विवाह की अग्नि से स्वीकृत कन्या रूपी भाग्य को देवों की आज्ञा के अनुसार यथार्थ वचन से मैं मनुष्य अर्थात् वर को प्राप्त कराता हूं. (२) इयमग्ने नारी पतिं विदेष्ट सोमो हि राजा सुभगां कृणोति. सुवाना पुत्रान् महिषी भवाति गत्वा पतिं सुभगा वि राजतु.. (३) हमारी यह कन्या पति को प्राप्त करे, जिस से सोम राजा इसे सौभाग्यशालिनी बनाएं. विवाह के पश्चात यह पुत्रों को जन्म देती हुई श्रेष्ठ पत्नी सिद्ध हो. इस प्रकार यह पति को पा कर सौभाग्ययुक्त एवं सुशोभित हो. (३) यथाखरो मघवंच्छारुरेषप्रियो मृगाणां सुषदा बभूव. एवा भगस्य जुष्टेयमस्तु नारी सम्प्रिया पत्याविराधयन्ती.. (४) जिस प्रकार प्रशंसनीय भोज्य पदार्थों से युक्त, शोभन एवं पशुओं के आवास वाला यह प्रदेश प्रिय एवं सुखद होता है, उसी प्रकार यह कन्या पति के साथ प्रसन्नता देने वाली वस्तुएं बनाती हुई सुख समृद्धि प्राप्त करे. (४) भगस्य नावमा रोह पूर्णामनुपदस्वतीम्. तयोपप्रतारय यो वरः प्रतिकाम्यः.. (५) हे कन्या! तू भाग्य के साधनों से पूर्ण एवं विनाशरहित नाव पर सवार हो. इस नाव के सहारे तू अपने मनचाहे पति को प्राप्त कर. (५) आ क्रन्दय धनपते वरमामनसं कृणु. सर्वं प्रदक्षिणं कृणु यो वरः प्रतिकाम्यः.. (६) हे धनपति कुबेर! पति के द्वारा यह कहलवाओ कि यह कन्या मेरी पत्नी बने. इस वर को कन्या की ओर अभिमुख करो तथा सभी प्राणियों को इस के विवाह के अनुकूल कार्य करने वाला बनाओ. यह कन्या अपना मनचाहा पति प्राप्त करे. (६) इदं हिरण्यं गुल्गुल्वयमौक्षो अथो भगः. एते पतिभ्यस्त्वामदुः प्रतिकामय वेत्तवे.. (७) ebook converter DEMO Watermarks*

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