अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 110, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंतीसरा कांड सूक्त-१ देवता—अग्नि, मरुत्, इंद्र अग्निर्नः शत्रून् प्रत्येतु विद्वान् प्रतिदहन्नभिशस्तिमरातिम्. स सेनां मोहयतु परेषां निर्हस्तांश्च कृणवज्जातवेदाः.. (१) हिंसक शत्रुओं की सेना को मोहित कर के जातवेद अर्थात् अग्नि शस्त्रास्त्र उठाने में असमर्थ बना दें. देवासुर संग्राम में देव सेना का प्रतिनिधित्व करने वाले अग्नि देव शत्रुओं के अंगों को भस्म करते हुए आगे बढ़ें. (१) यूयमुग्रा मरुत् ईदृशे स्थाभि प्रेत मृणत सहध्वम्. अमीमृणन् वसवो नाथिता इमे अग्निर्ह्येषां दूतः प्रत्येतु विद्वान्.. (२) हे मरुतो! तुम संग्राम में सहायता करने के लिए मेरे समीप रहो एवं मेरे शत्रुओं पर प्रहार करने जाओ. वसु देवगण भी मेरी प्रार्थना पर शत्रुनाश के लिए आगे बढ़ें. वसुओं में प्रधान अग्नि भी शत्रुओं को जानते हुए दूत के समान अग्रसर हो. (२) अमित्रसेनां मघवन्नस्माञ्छत्रूयतीमभि. युवं तामिन्द्र वृत्रहन्नग्निश्च दहतं प्रति.. (३) हे इंद्र! निरपराधों के प्रति शत्रु के समान आचरण करने वाली सेना के सामने जाओ. हे वृत्रनाशक इंद्र! तुम और अग्नि दोनों प्रतिकूल बन कर शत्रु सेना को भस्म करो. (३) प्रसूत इन्द्र प्रवता हरिभ्यां प्र ते वज्रः प्रमृणन्नेतु शत्रून्. जहि प्रतीचो अनूचः पराचो विष्वक् सत्यं कृणुहि चित्तमेषाम्.. (४) हे इंद्र! हरि नाम के अश्वों से युक्त रथ में बैठ कर तुम समतल मार्ग से अपने वज्र को धारण करते हुए शत्रु सेना की ओर गमन करो. तुम सामने और पीछे से आते हुए तथा युद्ध से मुंह मोड़ कर भागते हुए शत्रुओं का विनाश करो. हमारे विनाश के प्रति दृढ़ निश्चय वाले इन के चित्त को तुम सर्वथा अव्यवस्थित कर दो. (४) इन्द्र सेनां मोहयामित्राणाम्. अग्नेर्वातस्य ध्राज्या तान् विषूचो वि नाशय.. (५) हे इंद्र! हमारे शत्रुओं की सेना को कर्तव्य ज्ञान से शून्य बना दो. अग्नि और वायु के ebook converter DEMO Watermarks*