भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 144, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 144

सूक्त-२६ देवता—अग्नि ये ३ स्यां स्थ प्राच्यां दिशि हेतयो नाम देवास्तेषां वो अग्निरिषवः. ते नो मृडत ते नो ऽ धि ब्रूत तेभ्यो वो नमस्तेभ्यो वः स्वाहा.. (१) हे दान आदि गुण युक्त गंधर्वो! तुम हमारे निवास स्थान से पूर्व दिशा में हमारे विरोधियों को मारने वाले बनो. तुम्हारे अग्नि तुल्य बाण उन पूर्व दिशा के निवासियों से हमारी रक्षा करने में समर्थ हों. वे हमें सुखी करें. तुम्हारे बाण सर्प, बिच्छू आदि शत्रुओं को हम से दूर रखें. तुम हमें अपना कहो. हम तुम्हें नमस्कार करते और आहुति देते हैं. (१) ये ३ स्यां स्थ दक्षिणायां दिश्यविष्ववो नाम देवास्तेषां वः काम इषवः. ते नो मृडत ते नो ऽ धि ब्रूत तेभ्यो वो नमस्तेभ्यो वः स्वाहा.. (२) हे दान आदि गुणों से युक्त गंधर्वो! तुम हमारे निवास स्थान से दक्षिण दिशा में हमारे विरोधियों से हमारे रक्षक बनो. हमारी अभिलाषा ही तुम्हारा बाण है, वह हमारी रक्षा करे. तुम हमें अपना कहो. हम तुम्हें नमस्कार करें और आहुति देते रहें. (२) ये ३ स्यां स्थ प्रतीच्यां दिशि वैराजा नाम देवास्तेषां व आप इषवः. ते नो मृडत ते नो ऽ धि ब्रूत तेभ्यो वो नमस्तेभ्यो वः स्वाहा.. (३) हे देवो! तुम पश्चिम दिशा में हमें अन्न देने वाले बनो. वर्षा के जल तुम्हारे बाण हैं. वे हमारी रक्षा करें. तुम हमें अपना बनाओ. तुम्हें हम नमस्कार करते हैं और आहुति देते हैं. (३) ये ३ स्यां स्थोदीच्यां दिशि प्रविध्यन्तो नाम देवास्तेषां वो वात इषवः. ते नो मृडत ते नो ऽ धि ब्रूत तेभ्यो वो नमस्तेभ्यो वः स्वाहा.. (४) हे दान आदि गुणों से युक्त गंधर्वो! तुम उत्तर दिशा में हमारी हिंसा करने वालों को मारने वाले बनो. वायु ही तुम्हारा बाण है, वह हमारी रक्षा करे. तुम हमें अपना कहो. हम तुम्हें नमस्कार करते हैं और आहुति देते हैं. (४) ये ३ स्यां स्थ ध्रुवायां दिशि निलिम्पा नाम देवास्तेषां व ओषधीरिषवः. ते नो मृडत ते नो ऽ धि ब्रूत तेभ्यो वो नमस्तेभ्यो वः स्वाहा.. (५) हे दान आदि गुणों से युक्त गंधर्वो! तुम ध्रुव दिशा में अर्थात् पृथ्वी पर हमारी रक्षा करने वाले बनो. जौ, गेहूं, पेड़, पौधे आदि तुम्हारे बाण हैं. वे हमारी रक्षा करें. तुम हमें अपना कहो. हम तुम्हें नमस्कार करते हैं और आहुति देते हैं. (५) ये ३ स्यां स्थोध्र्वायां दिश्यवस्वन्तो नाम देवास्तेषां वो बृहस्पतिरिषवः. ते नो मृडत ते नो ऽ धि ब्रूत तेभ्यो वो नमस्तेभ्यो वः स्वाहा.. (६)