भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 150, कुल 1063 में से

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येन देवा न वियन्ति नो च विद्विषते मिथः. तत् कृण्मो ब्रह्म वो गृहे संज्ञानं पुरुषेभ्यः.. (४) जिस मंत्र के बल से देवगण, भिन्नभिन्न विचारों वाले नहीं बनते और परस्पर द्वेष नहीं करते, उसी मंत्र का प्रयोग मैं तुम्हारे घर में एकमत स्थापित करने के लिए करता हूं. (४) ज्यायस्वन्तश्चित्तिनो मा वि यौष्ट संराधयन्तः सधुराश्चरन्तः. अन्यो अन्यस्मै वल्गु वदन्त एत सध्रीचीनान् वः संमनसस्कृणोमि.. (५) हे मनुष्यो! तुम छोटेबड़े की भावना से एक दूसरे का अनुसरण करते हुए समान चित्त वाले, समान सिद्धि वाले तथा समान कार्य करने वाले बनो. इस प्रकार आचरण करते हुए तुम एक दूसरे से बिछुड़ो मत तथा एक दूसरे से प्रिय वचन बोलते हुए आओ. मैं भी तुम सब से मिलकर तुम्हें कार्यों में प्रवृत्त होने वाला तथा समान विचारों वाला बनाता हूं. (५) समानी प्रपा सह वो ऽ न्नभागः समाने योक्त्रे सह वो युनज्मि. सम्यञ्चो ऽ ग्निं सपर्यतारा नाभिमिवाभितः.. (६) हे समानता के इच्छुक जनो! तुम परस्पर प्रेम के कारण एक स्थान पर रह कर समान जल और अन्न का उपयोग करो. इस के लिए मैं तुम सब को प्रेम के एक बंधन में बांधता हूं. जिस प्रकार पहिए के अनेक अरे एक नाभि को घेरे रहते हैं, उसी प्रकार तुम सब एक फल की कामना करते हुए अग्नि की उपासना करो. (६) सध्रीचीनान् वः संमनसस्कृणोम्येकश्नुष्टीन्संवननेन सर्वान्. देवा इवामृतं रक्षमाणाः सायंप्रातः सौमनसो वो अस्तु.. (७) मैं तुम सब को एक कार्य करने में एक साथ संलग्न कर के समान विचारों वाला बनाता हूं तथा समान अन्न का उपयोग करने वाला और सौमनस्य कर्म के द्वारा तुम्हें वश में करता हूं. स्वर्गलोक में अमृत रक्षा करने वाले इंद्र आदि देवों का मन जिस प्रकार समान बना रहता है, उसी प्रकार मैं तुम्हें सभी समयों में समान मन वाला बनाता हूं. (७) सूक्त-३१ देवता—अग्नि आदि वि देवा जरसावृतन् वि त्वमग्ने अरात्या. व्य१हं सर्वेण पाप्मना वि यक्ष्मेण समायुषा.. (१) हे अश्विनीकुमारो! तुम इस बालक को आयु की हानि करने वाली वृद्धावस्था से दूर रखो. हे अग्नि! तुम इसे दान न देने के स्वभाव से और शत्रुओं से दूर रखो. मैं इसे रोग आदि दुःखों को उत्पन्न करने वाले पापों तथा यक्ष्मा रोग से पृथक् कर के चिर जीवन से संयुक्त करता हूं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*

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