भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 1063 में से

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(८) ईश्वर के द्वारा सब से प्रथम निर्मित जलों ने हिरण्यगर्भ को जन्म देने के लिए ईश्वर के वीर्य को धारण किया. उस उत्पन्न होने वाले प्रजापति के उल्ब अर्थात् गर्भ को घेरने वाली झील स्वर्णमय थी. हम हव्य द्वारा उस प्रजापति की पूजा करते हैं. (८) सूक्त-३ देवता—व्याघ्र उदितस्त्रयो अक्रमन् व्याघ्रः पुरुषो वृकः. हिरुग्धि यन्ति सिन्धवो हिरुग् देवो वनस्पतिर्हिरुङ् नमन्तु शत्रवः.. (१) बाघ, चोर मनुष्य और भेड़िए—ये तीन इस स्थान से भाग कर दूर चले जाएं. जिस प्रकार सरिताएं गूढ़ रूप में बहती हैं, उसी प्रकार बाघ आदि भी दिखाई न दें. वनस्पतियों के अधिष्ठाता देव जिस प्रकार वनस्पतियों में छिपे रहते हैं, उसी प्रकार बाघ आदि भी लुप्त हो जाएं. बाघ आदि के जो शत्रु हैं, वे उन्हें दूर भगा दें. (१) परेणैतु पथा वृकः परमेणोत तस्करः. परेण दत्वती रज्जुः परेणाघायुरर्षतु.. (२) जंगली हिंसक पशु भेड़िया हमारे चलनेफिरने के मार्ग से दूर चला जाए. चोर भेड़िए से भी अधिक दूर चला जाए. दांतों वाले, रस्सी के आकार वाले एवं दूसरे की हिंसा करने वाले सांप के अतिरिक्त अन्य हिंसक प्राणी भी हमारे संचरण मार्ग से दूर चले जाएं. (२) अक्ष्यौ च ते मुखं च ते व्याघ्र जम्भयामसि. आत् सर्वान् विंशतिं नखान्.. (३) हे बाघ! मैं तेरी दोनों आंखों और मुख को नष्ट करता हूं. इस के अतिरिक्त मैं तेरे चारों पैरों के बीस नाखूनों को भी नष्ट करता हूं. (३) व्याघ्रं दत्वतां वयं प्रथमं जम्भयामसि. आदु ष्टेनमथो अहिं यातुधानमथो वृकम्.. (४) हम दांतों से हिंसा करने वाले पशुओं में सब से पहले बाघ का नाश करते हैं. इस के पश्चात हम चोर, सर्प, यक्ष, राक्षस आदि तथा भेड़िए का नाश करते हैं. (४) यो अद्य स्तेन आयति स संपिष्टो अपायति. पथामपध्वंसेनेत्विन्द्रो वज्रेण हन्तु तम्.. (५) आज जो चोर आता है, वह हमारे द्वारा कुटपिट कर दूर भागे. वह मार्गों में से कष्टदायक मार्ग से जाए और इंद्र अपने वज्र से उस की हिंसा करें. (५) ebook converter DEMO Watermarks*