भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 169, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 169

यह प्रजापति रूप वृषभ निराशा उत्पन्न करने वाली दरिद्रता को अपने चारों चरणों से औंधे मुंह गिरा कर अपनी जंघाओं से धरती को खोदता है. यह बैल अपने श्रम से किसान को अन्न देता है. (१०) द्वादश वा एता रात्रीर्व्रत्या आहुः प्रजापतेः. तत्रोप ब्रह्म यो वेद तद् वा अनडुहो व्रतम्.. (११) इस वृषभ में व्याप्त यज्ञात्मक प्रजापति के व्रत के योग्य बारह रात्रियों को विद्यमान बताते हैं. उन रात्रियों में प्रजापति रूपी वृषभ को जो जानता है, वही इस व्रत का अधिकारी है. (११) दुहे सायं दुहे प्रातर्दुहे मध्यन्दिनं परि. दोहा ये अस्य संयन्ति तान् विद्वांनुपदस्वतः.. (१२) ऊपर बताए गए लक्षणों वाले वृषभ को मैं सायंकाल, प्रातःकाल और दोपहर के समय दुहता हूं. मैं सभी यज्ञों के अनुष्ठान के फलों को भी दुहता हूं. इस वृषभ के जो दोहन फल प्रदान करते हैं, उन्हें मैं जानता हूं. (१२) सूक्त-१२ देवता—रोहिणी वनस्पति रोहण्यसि रोहण्यस्थ्नश्छिन्नस्य रोहिणी. रोहयेदमरुन्धति.. (१) हे लाल रंग वाली लाख! तू घाव को भरने वाली है, इसलिए तू तलवार की धार से कटे हुए इस अंग से बहते रक्त को उसी स्थान पर रोक दे. हे अरुंधती देवी! तू इस रक्त निकले हुए अंग को रक्त युक्त एवं बिना घाव वाला बना. (१) यत् ते रिष्टं यत् ते द्युत्तमस्ति पेष्ट्रं त आत्मनि. धाता तद् भद्रया पुनः सं दधत् परुषा परुः.. (२) हे शस्त्र से घायल पुरुष! तेरा जो अंग घायल और शस्त्र प्रहार की वेदना से जल रहा है तथा तेरा जो अंग मुगदर आदि के प्रहार से भग्न हो गया है, विधाता तेरे उन अंगों को लाख के द्वारा जोड़ दे. (२) सं ते मज्जा मज्ज्ञा भवतु समु ते परुषा परुः. सं ते मांसस्य विस्रस्तं समस्थ्यपि रोहतु.. (३) हे घायल पुरुष! तेरे शरीर की जो चरबी चोट से विभक्त हो गई है, वह जुड़ जाए और तू सुख का अनुभव करे. तेरे शरीर की टूटी हुई हड्डी भी जुड़ जाए. प्रहार के घाव से कटा हुआ मांस सुखपूर्वक उत्पन्न हो जाए तथा तेरे शरीर की टूटी हुई हड्डी सुख से जुड़ जाए. (३) ebook converter DEMO Watermarks*