अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 170, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंमज्जा मज्ज्ञा सं धीयतां चर्मणा चर्म रोहतु. असृक् ते अस्थि रोहतु मांसं मांसेन रोहतु.. (४) तेरी चरबी से चरबी मिल जाए. चमड़ा चमड़े से मिल जाए और तेरे शरीर से टपकता हुआ रक्त मंत्र और ओषधि के प्रभाव से पुनः हड्डी को प्राप्त हो. तेरा मांस मांस से मिल जाए. (४) लोम लोम्ना सं कल्पया त्वचा सं कल्पया त्वचम्. असृक् ते अस्थि रोहतु च्छिन्नं सं धेह्योषधे.. (५) हे लाख नाम की ओषधि! तू प्रहार के कारण शरीर से पृथक् त्वचा को त्वचा से मिला दे. हे घायल पुरुष! तेरी हड्डियों पर रक्त दौड़ने लगे. हे ओषधि! शरीर का जो भी कटा हुआ भाग है, उसे जोड़ कर दैनिक गतिविधियों में सक्षम बना. (५) स उत् तिष्ठ प्रेहि प्र द्रव रथः सुचक्रः सुपविः सुनाभिः. प्रति तिष्ठोर्ध्वः.. (६) हे शस्त्र के प्रहार से घायल पुरुष! मंत्र और ओषधि की शक्ति से तेरा घायल अंग स्वस्थ हो गया है. तू चारपाई से उठ कर उसी प्रकार तेजी से दौड़, जिस प्रकार रथ उत्तम पहियों और दृढ़ धुरों से युक्त हो कर तेजी से चलता है. (६) यदि कर्तं पतित्वा संशश्रे यदि वाश्मा प्रहृतो जघान. ऋभू रथस्येवाङ्गानि सं दधत् परुषा परुः.. (७) हे पुरुष! यदि काटने वाला आयुध तेरे शरीर पर गिर कर उस को काट रहा है अथवा दूसरों के द्वारा फेंका हुआ पत्थर तुझे चोट पहुंचा रहा है, तेरे शरीर के उन अंगों को मंत्र और ओषधि का प्रभाव उसी प्रकार स्वस्थ बनाए, जिस प्रकार बढ़ई रथ के भिन्न अंगों को जोड़ कर एक कर देता है. (७) सूक्त-१३ देवता—विश्वे देव उत देवा अवहितं देवा उन्नयथा पुनः. उतागश्चक्रुषं देवा देवा जीवयथा पुनः.. (१) हे देवो! यज्ञोपवीत संस्कार वाले इस बालक को धर्म पालन के विषय में सावधान करो. इसे अध्ययन से उत्पन्न ज्ञान आदि फल प्राप्त कराओ. हे देवो! इस ने अनुष्ठान न करने के रूप में जो पाप किया है, उस से इस की रक्षा करो. तुम इसे सौ वर्ष तक जीवित रखो. (१) द्वाविमौ वातौ वात आ सिन्धोरा परावतः. दक्षं ते अन्य आवातु व्य १ न्यो वातु यद् रपः.. (२) ebook converter DEMO Watermarks*