अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 171, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसागर और उस से भी दूर देश से आने वाली दोनों प्रकार की हवाएं चलें. प्राण और अपान वायु इस के शरीर में गति करें. हे उपनयन संस्कार वाले पुरुष! प्राण वायु तुझे बल प्रदान करे तथा अपान वायु तेरे पापों को दूर करे. (२) आ वात वाहि भेषजं वि वात वाहि यद् रपः. त्वं हि विश्वभेषज देवानां दूत ईयसे.. (३) हे वायु! सभी रोगों का विनाश करने वाली जड़ीबूटी लाओ तथा रोग उत्पन्न करने वाले पाप का विनाश करो. हे वायु! तुम सभी व्याधियों को दूर करने वाली हो, इसीलिए तुम्हें इंद्र आदि देवों का दूत कहा जाता है. (३) त्रायन्तामिमं देवास्त्रायन्तां मरुतां गणाः. त्रायन्तां विश्वा भूतानि यथायमरपा असत्.. (४) इंद्र आदि देव इस उपनयन संस्कार वाले ब्रह्मचारी की रक्षा करें. उनचास मरुत् इस की रक्षा करें. सभी प्राणी इस की इस प्रकार रक्षा करें, जिस से यह पाप रहित हो सके. (४) आ त्वागमं शन्तातिभिरथो अरिष्टातिभिः. दक्षं त उग्रमाभारिषं परा यक्ष्मं सुवामि ते.. (५) हे उपनयन संस्कार वाले ब्रह्मचारी! मैं सुख देने वाले मंत्रों और कल्याणकारी कर्मों के साथ तेरे पास आया हूं. मैं तेरे लिए उग्र एवं समृद्धि देने वाला बल लाया हूं. मैं यक्ष्मा रोग को तुझ से दूर भगाता हूं. (५) अयं मे हस्तो भगवानयं मे भगवत्तरः. अयं मे विश्वभेषजो ऽ यं शिवाभिमर्शनः.. (६) मुझ ऋषि का यह हाथ भाग्य वाला एवं भाग्यवालियों से भी अधिक उत्तम है. मेरा यह हाथ सभी रोगों को दूर करने वाली ओषधि है. इस का स्पर्श सुख देने वाला हो. (६) हस्ताभ्यां दशशाखाभ्यां जिह्वा वाचः पुरोगवी. अनामयित्नुभ्यां हस्ताभ्यां ताभ्यां त्वाभि मृशामसि.. (७) हे उपनयन संस्कार वाले बालक! प्रजापति के दस उंगलियों वाले हाथों के द्वारा निर्मित जीभ शब्दों के आगेआगे चलती है. सरस्वती का उस में अधिष्ठान है. प्रजापति के उन्हीं रोगनाशक हाथों से मैं तेरा स्पर्श करता हूं. (७) सूक्त-१४ देवता—अग्नि, आज्य अजो ह्य१ग्नेरजनिष्ट शोकात् सो अपश्यज्जनितारमग्रे. ebook converter DEMO Watermarks*