अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंचुपड़ता हूं. इस प्रकार के बकरे की सहायता से पुण्य के फल के रूप में मिलने वाले स्वर्गलोक को जाएं तथा दुःख के स्पर्श से शून्य हो कर उत्तम सूर्य ज्योति को प्राप्त करें. (६) पञ्चौदनं पञ्चभिरङ्गुलिभिर्दर्व्योद्धर पञ्चधैतमोदनम्. प्राच्यां दिशि शिरो अजस्य धेहि दक्षिणायां दिशि दक्षिणं धेहि पार्श्वम्.. (७) हे पाचक! पांच भागों में कटे हुए इस बकरे को अपनी पांच उंगलियों की सहायता से पकड़ी हुई कलछी के सहारे बटलोई से निकाल कर कुशों पर रखो. पांच भागों में विभाजित इस बकरे के पके हुए सिर को पूर्व दिशा में रखो तथा इस के शरीर के दाएं भाग को दक्षिण दिशा में स्थापित करो. (७) प्रतीच्यां दिशि भसदमस्य धेह्युत्तरस्यां दिश्युत्तरं धेहि पार्श्वम्. ऊर्ध्वायां दिश्य१जस्यानूकं धेहि दिशि ध्रुवायां धेहि पाजस्यमन्तरिक्षे मध्यतो मध्यमस्य.. (८) इस बकरे की कमर के पके हुए मांस को पश्चिम दिशा में तथा इस के बाएं भाग के मांस को उत्तर दिशा में रखो. इस की पीठ के मांस को ऊपर की दिशा में तथा पेट के मांस को नीचे की दिशा में रखो. इस के शरीर के मध्यवर्ती मांस को आकाश में स्थापित करो. (८) शृतमजं शृतया प्रोर्णुहि त्वचा सर्वैरङ्गैः सम्भृतं विश्वरूपम्. स उत् तिष्ठेतो अभि नाकमृत्तमं पद्भिश्चतुर्भिः प्रति तिष्ठ दिक्षु.. (९) अपने सभी अंगों से पूर्ण बने बकरे को सभी दिशाओं में व्याप्त करो. हे बकरे! तुम इस लीक से चारों पैरों के द्वारा स्वर्गलोक में चढ़ते हुए चारों दिशाओं को व्याप्त करो. (९) सूक्त-१५ देवता—दिशाएं समुत्पतन्तु प्रदिशो नभस्वतीः समभ्राणि वातजूतानि यन्तु. महऋषभस्य नदतो नभस्वतो वाश्रा आपः पृथिवीं तर्पयन्तु.. (१) पूर्व आदि दिशाएं वायु एवं मेघों से युक्त हो कर उदय हों. जल से भरे हुए मेघ वायु से प्रेरित हो कर परस्पर मिल जाएं. सांड के समान गर्जन करते हुए एवं वायु से प्रेरित मेघ द्वारा बरसाए गए जल धरती को तृप्त करें. (१) समीक्ष्यन्तु तविषाः सुदानवो ऽ पां रसा ओषधीभिः सचन्ताम्. वर्षस्य सर्गा महयन्तु भूमिं पृथग् जायन्तामोषधयो विश्वरूपाः.. (२) महान् एवं शोभन गान वाले मरुद्गण वर्षा के द्वारा हम पर अनुग्रह करें. जलों के रस धरती में बोए गेहूं, जौ आदि के बीजों से मिल जाएं. वर्षा के जल की धाराएं धरती की पूजा ebook converter DEMO Watermarks*