भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 180, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 180

अमा कृत्वा पाप्मानं यस्तेनान्यं जिघांसति. अश्मानस्तस्यां दग्धायां बहुलाः फट् करिक्रति.. (३) जो शत्रु अनुकूल के समान साथ रह कर कृत्या निर्माण रूपी पाप करता है और उस के द्वारा उस मनुष्य को मारना चाहता है, जिस के प्रति उस का द्वेष होता है. उस कृत्या के प्रतिकार के द्वारा प्रभावहीन होने पर मेरे मंत्रों के सामर्थ्य से उत्पन्न पाषाण कृत्या बनाने वाले शत्रु की हिंसा करें. (३) सहस्रधामन् विशिखान् विग्रीवाञ्छायया त्वम्. प्रति स्म चकृषे कृत्यां प्रियां प्रियावते हर.. (४) हे हजार स्थानों में होने वाली सहदेवी! तू हमारे शत्रुओं के केशों एवं ग्रीवा को काट कर उन का विनाश कर. तू हमारे शत्रुओं का हित करने वाली कृत्या को उन्हीं की ओर लौटा दे, जिन्होंने उस का निर्माण किया है. (४) अनयाहमोषध्या सर्वाः कृत्या अदूदुषम्. यां क्षेत्रे चक्रुर्यां गोषु यां वा ते पुरुषेषु.. (५) इस सहदेवी नाम की जड़ीबूटी के द्वारा मैं ने सभी कृत्याओं को दूषित एवं प्रभावहीन बना दिया है. मेरे शत्रुओं ने जिस कृत्या को मेरे खेतों में, मेरी गोशाला में और वायु संचार वाले स्थान में गाड़ दिया है, उन सभी कृत्याओं को मैं प्रभावहीन कर चुका हूं. (५) यश्चकार न शशाक कर्तुं शश्रे पादमङ्गुरिम्. चकार भद्रमस्मभ्यमात्मने तपनं तु सः.. (६) जिस शत्रु ने कृत्या का निर्माण किया है तथा उस के द्वारा मेरे एक पैर और एक उंगली को नष्ट करना चाहता है, वह मेरी हिंसा न कर सके. उस के द्वारा किया गया अभिचार कर्म मेरे मंत्र और जड़ीबूटी के प्रभाव से मेरा मंगल करे तथा कृत्या निर्माण करने वाले को जला दे. (६) अपामार्गो ऽ प मार्ष्टु क्षेत्रियं शपथश्च यः. अपाह यातुधानीरप सर्वा अराय्यः.. (७) अपामार्ग जड़ी मातापिता से होने वाले संक्रामक रोग के रूप में हम को प्राप्त क्षय, कुष्ठ, अपस्मार आदि को दूर करे. यह हमारे शत्रुओं द्वारा दिए हुए पापों को, पिशाचियों को और दरिद्रता को भी दूर करे. (७) अपमृज्य यातुधानानप सर्वा अराय्यः. अपामार्ग त्वया वयं सर्वं मृज्महे.. (८) ebook converter DEMO Watermarks*