भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 181, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 181

हे अपामार्ग! तुम सभी यक्षों, राक्षसों और दरिद्रता उत्पन्न करने वाली पिशाचियों को मुझ से दूर करो. हम यक्ष, राक्षस एवं पिशाचियों द्वारा किए हुए सभी दुःखों को तुम्हारे द्वारा प्रभावहीन करते हैं. (८) सूक्त-१९ देवता—अपामार्ग वनस्पति उतो अस्यबन्धुकृदुतो असि नु जामिकृत्. उतो कृत्याकृतः प्रजां नडमिवा च्छिन्धि वार्षिकम्.. (१) हे अपामार्ग अथवा सहदेवी! तू शत्रुओं और विरोधियों का विनाश करने में समर्थ है. तू कृत्या का प्रयोग करने वाले के पुत्र, पौत्र आदि को वर्षा ऋतु में उत्पन्न होने वाली नड नाम की घास के समान काट कर नष्ट कर दे. (१) ब्राह्मणेन पर्युक्तासि कण्वेन नार्षदेन. सेनेवैषि त्विषीमती न तत्र भयमस्ति यत्र प्राप्नोष्याषधे.. (२) हे सहदेवी अथवा अपामार्ग निषाद के पुत्र कर्ण नामक मंत्रद्रष्टा ब्राह्मण ने तेरा प्रयोग किया है. यजमान की रक्षा के लिए तू सेना के समान गमन करती है. तू जिस देश में प्राप्त होती है, वहां अभिचार संबंधी भय नहीं रहता. (२) अग्रमेष्योषधीनां ज्योतिषेवाभिदीपयन्. उत त्रातासि पाकस्याथो हन्तासि रक्षसः.. (३) हे सहदेवी अथवा अपामार्ग! तू सभी जड़ीबूटियों में उसी प्रकार श्रेष्ठ है, जिस प्रकार प्रकाश करने वालों में सूर्य! तू दुर्बल की रक्षक और उसे बाधा पहुंचाने वाले राक्षस की विनाशक है. (३) यददो देवा असुरांस्त्वयाग्रे निरकुर्वत. ततस्त्वमध्योषधे ऽ पामार्गो अजायथाः.. (४) हे ओषधि! प्राचीन काल में इंद्र आदि देवों ने तेरे द्वारा ही राक्षसों को पराजित किया था. इसी कारण तू ने अपामार्ग नाम प्राप्त किया था. (४) विभिन्दती शतशाखा विभिन्दम् नाम ते पिता. प्रत्यग् वि भिन्धि त्वं तं यो अस्मां अभिदासति.. (५) हे अपामार्ग! तू सैकड़ों शाखाओं वाली हो कर विभिंदती नाम प्राप्त करती है. तूझे उत्पन्न करने वाला विभिंद कहलाता है. जो शत्रु हमारा विनाश करना चाहता है, तू उस की विरोधी बन कर उस का विनाश कर. (५) ebook converter DEMO Watermarks*