भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 184, कुल 1063 में से

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जो पिशाच अंतरिक्ष से गिरता है, जो स्वर्गलोक से ऊपर गमन करता है और धरती को अपने अधिकार में मानता है, उस पिशाच को भी मुझे दिखा, जिस से मैं उस का निराकरण कर सकूं. (९) सूक्त-२१ देवता—गाएं आ गावो अग्मन्नुत भद्रमक्रन्त्सीदन्तु गोष्ठे रणयन्त्वस्मे. प्रजा ऽ वती: पुरुरूपा इह स्युरिन्द्राय पूर्वीरुषसो दुहाना:.. (१) गाएं हमारी ओर आएं, हमारा कल्याण करें, हमारी गोशाला में बैठें तथा हमें दूध आदि दे कर प्रसन्न करें. श्वेत, कृष्ण आदि अनेक वर्णों की गाएं अधिक संतान वाली हो कर यजमान के घर में समृद्ध बनें तथा अधिक समय तक इंद्र के निमित्त दूध देती रहें. (१) इन्द्रो यज्वने गृणते च शिक्षत उपेद् ददाति न स्वं मुषायति. भूयोभूयो रयिमिदस्य वर्धयन्नभिन्ने खिल्ये नि दधाति देवयुम्.. (२) इंद्र स्तुति करने वाले यजमानों को गाय प्राप्त करने का उपाय बताते हैं तथा उन्हें बहुत सी गाएं प्रदान करते हैं. इंद्र उस यजमान के धन का अपहरण नहीं करते. वे उस स्तोता और यजमान के धन को अधिक मात्रा में बढ़ाते हुए उसे स्वर्ग में स्थान दिलाते हैं, जिस में दुःख नहीं होता. (२) न ता नशन्ति न दभाति तस्करो नासाममित्रो व्यथिरा दधर्षति. देवांश्च याभिर्यजते ददाति च ज्योगित् ताभि: सचते गोपत्ति: सह.. (३) इंद्र के द्वारा दी गई गाएं नष्ट न हों तथा उन्हें चोर न चुरा सकें. शत्रुओं के आयुध उन गायों को पीड़ा न पहुंचाएं. जिन गायों के दूध और घी के द्वारा यज्ञ किया जाता है और जिन्हें यज्ञ की दक्षिणा के रूप में दिया जाता है, उन गायों के साथ यजमान अधिक समय तक रहे, उन से वियुक्त न हो. (३) न ता अर्वा रेणुककाटो ऽ श्रुते न संस्कृतत्रमुप यन्ति ता अभि. उरुगायमभयं तस्य ता अनु गावो मर्तस्य वि चरन्ति यज्वन:.. (४) हिंसक एवं कमर के टुकड़े करने वाले बाघ आदि दुष्ट पशु उन गायों तक न पहुंचें. वे गाएं मांस पकाने वाले के समीप न जाएं एवं यजमान के भय रहित स्थान को प्राप्त हों. (४) गावो भगो गाव इन्द्रो म इच्छाद् गाव: सोमस्य प्रथमस्य भक्ष:. इमा या गाव: स जनास इन्द्र इच्छामि हृदा मनसा चिदिन्द्रम्.. (५) गाएं ही पुरुष का धन और सौभाग्य हैं. इंद्र ऐसी इच्छा करें, जिस से मुझे गाएं मिल सकें. छाना गया सोमरस गायों के दूध और दही में ही सिद्ध किया जाता है. हे मनुष्यो! ये जो ebook converter DEMO Watermarks*