भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 204, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 204

अव बाधे द्विषन्तं देवपीयुं सपत्ना ये मे ऽ प ते भवन्तु. ब्रह्मोदनं विश्वजितं पचामि शृण्वन्तु मे श्रद्दधानस्य देवाः.. (७) मैं हिंसा करने वाले शत्रु का वध करता हूं तथा देवों के हिंसकों की हत्या करता हूं. जो मेरे शत्रु हैं, वे भाग जाएं. इस के निमित्त मैं सब को जीतने वाले ब्रह्मोदन को पकाता हूं. मुझ श्रद्धालु के वचनों को देव सुनें और मेरी सहायता करें. (७) सूक्त-३६ देवता—सत्य ओज वाले अग्नि तान्तसत्यौजाः प्र दहत्वग्निर्वैश्वानरो वृषा. यो नो दुरस्याद् दिप्साच्चाथो यो नो अरातियात्.. (१) सच्चे बल वाले, वैश्वानर एवं गर्भाधान में समर्थ अग्नि उन शत्रुओं को जलाएं, जो हमारे प्रति दुष्टों के समान आचरण करें, जो हमारी हिंसा करना चाहें तथा जो हमारे प्रति शत्रु के समान आचरण करें. (१) यो नो दिप्साददिप्सतो दिप्सतो यश्च दिप्सति. वैश्वानरस्य दंष्ट्रयोरग्नेरपि दधामि तम्.. (२) जो शत्रु हिंसा की इच्छा न करने वाले मुझ को मारना चाहता है तथा जिस हिंसा की इच्छा करने वाले को मैं मारना चाहता हूं, उस को मैं वैश्वानर अग्नि की दाढ़ों में रखता हूं. (२) य आगरे मृगयन्ते प्रतिक्रोशे ऽ मावास्ये. क्रव्यादो अन्यान् दिप्सतः सर्वांस्तान्सहसा सहे.. (३) युद्ध भूमि में जो पिशाच हमें खाने के लिए खोजते हैं तथा शत्रुओं द्वारा किए गए आक्रोश के कारण अमावस्या की आधी रात में हमें मारना चाहते हैं, हम मंत्रों के प्रभाव से उन्हें पराजित करते हैं. (३) सहे पिशाचान्त्सहसैषां द्रविणं ददे. सर्वान् दुरस्यतो हन्मि सं म आकूतिर्ऋध्यताम्.. (४) मैं बल के द्वारा राक्षसों को पराजित करता हूं तथा उन राक्षसों के धन को अपने अधिकार में करता हूं. मैं द्वेष करने वाले सभी शत्रुओं को मारता हूं. मेरा इष्ट फल विषयक संकल्प और सुख समृद्ध हो. (४) ये देवास्तेन हासन्ते सूर्येण मिमते जवम्. नदीषु पर्वतेषु ये सं तैः पशुभिर्विदे.. (५) हे अग्नि आदि देवो! जो पशु, राक्षस, पिशाच आदि से बचना चाहते हैं तथा उन्हें छोड़ ebook converter DEMO Watermarks*