अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंअन्तरिक्षं धेनुस्तस्या वायुर्वत्सः. सा मे वायुना वत्सेनेषमूर्जं कामं दुहाम्. आयुः प्रथमं प्रजां पोषं रयिं स्वाहा.. (४) अंतरिक्ष गाय है और वायु उस का बछड़ा है. वह गाय वायु रूपी बछड़े के कारण मुझे बलकारक अन्न पर्याप्त मात्रा में प्रदान करे. वायु मुझे सौ वर्ष की आयु, प्रजा, पुष्टि एवं धन दे. यह हवि उत्तम आहुति वाला हो. (४) दिव्यादित्याय समनमन्त्या आध्र्नोत्. यथा दिव्यादित्याय समनमन्नेवा मह्यं संनमः सं नमन्तु.. (५) द्युलोक में स्थित सूर्य के लिए वहां के सभी प्राणियों ने नमस्कार किया. उस नमस्कार से सूर्य प्रसन्न हुए. प्राणियों ने जिस प्रकार द्युलोक के सूर्य के लिए नमस्कार किया, उसी प्रकार मेरे लिए भी नमस्कार करें. (५) द्यौर्धेनुस्तस्या आदित्यो वत्सः. सा म आदित्येन वत्सेनेषमूर्जं कामं दुहाम्. आयुः प्रथमं प्रजां पोषं रयिं स्वाहा.. (६) द्यौ गाय है और सूर्य उस का बछड़ा है. वह द्यौ रूपी गाय सूर्य रूपी बछड़े के कारण मेरे लिए मनचाहा बलकारक अन्न प्रदान करे. वह मुझे सौ वर्ष की आयु, प्रजा, पुष्टि और धन प्रदान करे. यह हवि उत्तम आहुति वाला हो. (६) दिक्षु चन्द्राय समनमन्तस आध्र्नोत्. यथा दिक्षु चन्द्राय समनमन्नेवा मह्यं संनमः सं नमन्तु.. (७) दिशाओं में वर्तमान चंद्रमा के लिए वहां के जीवों ने नमस्कार किया. इस से चंद्रमा बहुत प्रसन्न हुए. जीवों ने जिस प्रकार चंद्रमा के लिए नमस्कार किया, उसी प्रकार मेरे लिए भी करेंगे. (७) दिशो धेनवस्तासां चन्द्रो वत्सः. ता मे चन्द्रेण वत्सेनेषमूर्जं कामं दुहाम्. आयुः प्रथमं प्रजां पोषं रयिं स्वाहा.. (८) दिशाएं गाय हैं और चंद्रमा उन का बछड़ा है. वे दिशाएं चंद्रमा रूपी बछड़े के कारण मुझे मनचाहा बलकारक अन्न प्रदान करें. वे मुझे सौ वर्ष की आयु, प्रजा, पुष्टि एवं धन दें. (८) अग्नावग्निश्चरति प्रविष्ट ऋषीणां पुत्रो अभिशस्तिपा उ. नमस्कारेण नमसा ते जुहोमि मा देवानां मिथुया कर्म भागम्.. (९)