अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 212, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंकर रहे हैं, वे उत्तर दिशा से हमारी हिंसा करते हैं. वे शत्रु हमारी ओर से मुंह फेर कर जल जाएं. उन जादूटोना करने वालों को हम उन के जादूटोने उन्हीं की ओर लौटा कर मारते हैं. (४) ये ३ ऽ धस्ताज्जुह्वति जातवेदो ध्रुवाया दिशो ऽ भिदासन्त्यस्मान्. भूमिमृत्वा ते पराञ्चो व्यथन्तां प्रत्यगेनान् प्रतिसरेण हन्मि.. (५) हे जातवेद अग्नि! जो शत्रु हमारे निवास से नीचे की दिशा में हवन कर के जादूटोना कर रहे हैं, वे नीचे की दिशा से हमारी हिंसा करते हैं. वे शत्रु हमारी ओर से मुंह फेर कर जल जाएं. उन जादूटोना करने वालों को हम उन के जादूटोने उन्हीं की ओर वापस कर के मारते हैं. (५) ये ३ ऽ न्तरिक्षाज्जुह्वति जातवेदो व्यध्वाया दिशो ऽ भिदासन्त्यस्मान्. वायुमृत्वा ते पराञ्चो व्यथन्तां प्रत्यगेनान् प्रतिसरेण हन्मि.. (६) हे जातवेद अग्नि! जो शत्रु हमारे निवास स्थान से अंतरिक्ष की दिशा में हवन कर के जादूटोना कर रहे हैं, वे अंतरिक्ष की दिशा से हमारी हिंसा करते हैं, वे शत्रु हमारी ओर से मुंह फेर कर जल जाएं. उन जादूटोना करने वालों को हम उन के जादूटोने उन्हीं की ओर वापस कर के मारते हैं. (६) य उपरिष्टाज्जुह्वति जातवेदः ऊर्ध्वाया दिशो ऽ भिदासन्त्यस्मान्. सूर्यमृत्वा ते पराञ्चो व्यथन्तां प्रत्यगेनान् प्रतिसरेण हन्मि.. (७) हे जातवेद अग्नि! जो शत्रु हमारे निवास स्थान से ऊपर की दिशा में हवन कर के जादूटोना कर रहे हैं, वे ऊपर की दिशा से हमारी हिंसा करते हैं. वे शत्रु हमारी ओर से मुंह फेर कर जल जाएं. उन जादूटोना करने वालों को हम उन के जादूटोने उन्हीं की ओर वापस कर के मारते हैं. (७) ये दिशामन्तर्देशेभ्यो जुह्वति जातवेदः सर्वाभ्यो दिग्भ्यो ऽ भिदासन्त्यस्मान्. ब्रह्मर्त्वा ते पराञ्चो व्यथन्तां प्रत्यगेनान् प्रतिसरेण हन्मि.. (८) हे जातवेद अग्नि! जो शत्रु अन्तर्दिशाओं में आहुति डालकर जादूटोने द्वारा दिशाओं के कोणों से हमें नष्ट करना चाहता, वह शत्रु पराजित होते हुए कष्ट भोगे. अपने शत्रुओं को हम प्रतिसर कर्म से नष्ट करते हैं. (८)