अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 241, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसूर्य, वरुण, वायु, चंद्र तथा आप अर्थात् जलदेवी—ये देवता ब्रह्म से उत्पन्न हुए हैं. इन्होंने ब्राह्मण द्वारा अपराध करने के विषय में कहा है. (१) सोमो राजा प्रथमो ब्रह्मजायां पुनः प्रायच्छदहृणीयमानः. अन्वर्तिता वरुणो मित्र आसीदग्निर्होता हस्तगृह्या निनाय.. (२) सब से पहले सोम ने ब्रह्म के लिए उस गाय को दे दिया, जिस ने उन्हें उत्पन्न किया था. उस समय वरुण और सूर्य सोम के सहयोगी बने और अग्नि उन के होता थे. (२) हस्तेनैव ग्राह्य आधिरस्या ब्रह्मजायेति चेदवोचत्. न दूताय प्रहेया तस्थ एषा तथा राष्ट्रं गुपितं क्षत्रियस्य.. (३) यह हम को उत्पन्न करने वाली है, इस प्रकार जो कहे उस का संकल्प हाथ में ले. यह संकल्प लेने के लिए दूत को न भेजे. (३) यामाहुस्तारकैषा विकेशीति दुच्छुनां ग्राममवपद्यमानाम्. सा ब्रह्मजाया वि दुनोति राष्ट्रं यत्र प्रापादि शश उल्कुषीमान्.. (४) ग्राम की ओर बढ़ती हुई तारिका को उल्का कहते हैं. उस उल्का का अंश जहां गिरता है, उस राज्य का नाश हो जाता है. इस प्रकार ब्रह्म से उत्पन्न तारिका राज्य का नाश कर देती है. (४) ब्रह्मचारी चरति वेविषद् विषः स देवानां भवत्येकमङ्गम्. तेन जायामन्वविन्दद् बृहस्पतिः सोमेन नीतां जुह्वं१ न देवाः.. (५) ब्रह्मचर्य देवता का अंग रूप होता है. वह ब्रह्मचर्य में रमण करता हुआ प्रजा के मध्य घूमता है. जिस प्रकार देवों ने सोम के चमस को प्राप्त किया है, उसी प्रकार बृहस्पति ने ब्रह्मचर्य के द्वारा पत्नी को पाया. (५) देवा वा एतस्यामवदन्त पूर्वे सप्तऋषयस्तपसा ये निषेदुः. भीमा जाया ब्राह्मणस्यापनीता दुर्धा दधाति परमे व्योमन्.. (६) तपस्या में लीन रहने वाले सप्त ऋषियों ने और देवों ने ब्राह्मण जाया की चर्चा की थी कि ब्राह्मण की अपहरण की गई स्त्री स्वर्ग में भयंकर बन जाती है और अपहरण कर्ता की दुर्गति करती है. (६) ये गर्भा अवपद्यन्ते जगद् यच्चापलुप्यते. वीरा ये तृह्यन्ते मिथो ब्रह्मजाया हिनस्ति तान्.. (७) जो गर्भ गिराए जाते हैं, संसार में जो उथलपुथल होती है, वीरों की परस्पर मारकाट, ये ebook converter DEMO Watermarks*