भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 242, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 242

सारे कर्म ब्राह्मण की पत्नी ही करती है. (७) उत यत् पतयो दश स्त्रियाः पूर्वे अब्राह्मणाः. ब्रह्मा चेद्धस्तमग्रहीत् स एव पतिरेकधा.. (८) ब्राह्मण की पत्नी के पूर्व अब्राह्मण बालक चाहे दस हों, पर जो ब्राह्मण उस का पाणि ग्रहण करता है, वही उस का पति होता है. (८) ब्राह्मण एव पतिर्न राजन्यो ३ न वैश्यः. तत् सूर्यः प्रब्रुवन्नेति पञ्चभ्यो मानवेभ्यः.. (९) ब्राह्मणी का पति ब्राह्मण ही हो सकता है, क्षत्रिय और वैश्य नहीं. सूर्य देव पांच प्रकार के मानव—ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र और निषाद यह कहते हुए दमन करते हैं. (९) पुनर्वे देवा अददुः पुनर्मनुष्या अददुः. राजानः सत्यं गृह्नाना ब्रह्मजायां पुनर्ददुः.. (१०) ब्राह्मण पत्नी को देवों, मनुष्यों और राजाओं ने सत्य को ग्रहण कर के प्रदान किया. (१०) पुनर्दाय ब्रह्मजायां कृत्वा देवैर्नािकल्बिषम्. ऊर्जं पृथिव्या भक्त्वोरुगायमुपासते.. (११) हम देवों द्वारा स्वच्छ किए हुए शक्तिदायक अन्न का विभाग कर के ब्राह्मण पत्नी को देते हैं तथा अत्यधिक कीर्तिशाली परमात्मा की उपासना करते हैं. (११) नास्य जाया शतवाही कल्याणी तल्पमा शये. यस्मिन् राष्ट्रे निरुध्यते ब्रह्मजायाचित्त्या.. (१२) जिस राज्य में ब्राह्मण की पत्नी और गाय को बाधा पहुंचाई जाती है, वहां भांतिभांति के कल्याण करने वाली पत्नी शैय्या पर शयन नहीं करती. (१२) न विकर्णः पृथुशिरास्तस्मिन् वेश्मनि जायते. यस्मिन् राष्ट्रे निरुध्यते ब्रह्मजायाचित्त्या.. (१३) जिस राज्य में ब्राह्मण की पत्नी को अचेत कर के रोका जाता है, उस राज्य में विशाल मस्तक वाले पुरुष जन्म नहीं लेते. (१३) नास्य क्षत्ता निष्कग्रीवः सूनानामेत्यग्रतः. यस्मिन् राष्ट्रे निरुध्यते ब्रह्मजायाचित्त्या.. (१४) ebook converter DEMO Watermarks*

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