भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 246, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 246

हे राजन्! ब्राह्मण की वाणी रूपी बाण विष में बुझे बाण एवं सर्पिणी के समान भयानक होता है. जो पापी ब्राह्मण को कष्ट देते हैं, ब्राह्मण उन्हें उन्हीं के द्वारा नष्ट करता है. (१५) सूक्त-१९ देवता—ब्रह्मगवी अतिमात्रमवर्धन्त नोदिव दिवमस्पृशन्. भृगुं हिंसित्वा सृञ्जया वैतहव्या: पराभवन्.. (१) संजय के पुत्र एवं वीतहव्य के वंशजों की बहुत वृद्धि हुई. उन्होंने भृगुवंशी ब्राह्मणों की हत्या कर दी, इसलिए उन की पराजय हुई तथा वे स्वर्ग को नहीं पा सके. (१) ये बृहत्सामानमाङ्गिरसमार्पयन् ब्राह्मणं जना:. पेत्वस्तेषामुभयादमविस्तोकान्यावयत्.. (२) जिन लोगों ने बृहत् साम वाले अंगिरा गोत्री ब्राह्मणों को आपत्तियों और विपत्तियों से ढक दिया था, ब्रह्मा ने उन्हें ऐसा पुत्र दिया जो उन्हें नष्ट करने वाला था. देवों ने उन की संतान को दूर फेंक दिया. (२) ये ब्राह्मणं प्रत्यष्ठीवन् ये वास्मिञ्छुल्कमषीषिरे. अस्रस्ते मध्ये कुल्याया: केशान् खादन्त आसते.. (३) जिन्होंने ब्राह्मणों पर थूका और जिन्होंने ब्राह्मणों से धन लेने की इच्छा की, वे रक्त की सरिता में पड़े हैं और बालों को खा रहे हैं. (३) ब्रह्मगवी पच्यमाना यावत् साभि विजङ्गहे. तेजो राष्ट्रस्य निर्हन्ति न वीरो जायते वृषा.. (४) ब्राह्मण की पकाई जाती हुई गाय जिस राष्ट्र में तड़पती है, वह उस राष्ट्र का तेज समाप्त कर देती है और उस में वीर्य को सींचने वाले वीर पुरुष जन्म नहीं लेते. (४) क्रूरमस्या आशनं तृष्टं पिशितमस्यते. क्षीरं यदस्या: पीयते तद् वै पितृषु किल्बिषम्.. (५) ब्राह्मण की गाय को काटना क्रूर कर्म है. इस का मांस खाने के बाद प्यास प्यास करता है. जो लोग मारने की इच्छा से रखी हुई ऐसी गाय का दूध पीते हैं, उन के पितरों को वह दूध पाप का भागी बनाता है. (५) उग्रो राजा मन्यमानो ब्राह्मणं यो जिघत्सति. परा तत् सिच्यते राष्ट्रं ब्राह्मणो यत्र जीयते.. (६) ebook converter DEMO Watermarks*