अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 252, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंहे सर्प! तुम शत्रुओं के नेत्रों की देखने की शक्ति छीन लो. हे सूर्य किरणो! तुम दौड़ते हुए शत्रुओं की पीठ पर पड़ो. भुजाओं की शक्ति क्षीण होने पर जब शत्रु भागने लगे तो उन का साथ मत दो. (१०) यूयमुग्रा मरुतः पृश्निमातर इन्द्रेण युजा प्र मृणीत शत्रून्. सोमो राजा वरुणो राजा महादेव उत मृत्युुरिन्द्रः.. (११) हे मरुतो! तुम उग्र कर्म करने वाले हो. तुम इंद्र के साथ मिल कर शत्रुओं का मर्दन करो. सोम राजा, वरुण राजा, महादेव और मृत्युदेव इंद्र का सहयोग करें. (११) एता देवसेनाः सूर्यकेतवः सचेतसः. अमित्रान् नो जयन्तु स्वाहा.. (१२) ये देव सेनाएं समान चित्त वाली हैं और इन के झंडे में सूर्य विराजमान हैं. ये सेनाएं शत्रुओं पर विजय प्राप्त करें. मेरी यह आहुति ग्रहण करने योग्य हो. (१२) सूक्त-२२ देवता—तक्मानाशन अग्निस्तक्मानमप बाधतामितः सोमो ग्रावा वरुणः पूतदक्षाः. वेदिर्बर्हिः समिधः शोशुचाना अप द्वेषांस्यमुया भवन्तु.. (१) अग्नि देव ज्वर को बाधा पहुंचाएं. पत्थर के समान दृढ़ सौम्य, पवित्र और दक्ष वरण, वेल्वी, कुश तथा प्रज्वलित समिधाएं ज्वर से द्वेष करने वाली हों. (१) अयं यो विश्वान् हरितान् कृणोष्युच्छोचयन्नग्निरिवाभिदुन्वन्. अधा हि तक्मन्नरसो हि भूया अधा न्य ङ्ङधराङ् वा परेहि.. (२) हे देह को नष्ट कर देने वाले ज्वर! तू सभी मनुष्यों को संताप देता है. इसलिए तू तिरस्कृत, निर्बल एवं अधम स्थान को चला जा. (२) यः परुषः पारुषेयो ऽ वध्वंस इवारुणः. तक्मानं विश्वधावीर्याधराज्चं परा सुवा.. (३) हे शक्तिशाली! तुम कठोर एवं अवध्वंस के समान लाल रंग वाले ज्वर को मुझ से दूर हटाओ. (३) अधराज्चं प्र हिणोमि नमः कृत्वा तक्मने. शकम्भरस्य मुष्टिहा पुनरेतु महावृषान्.. (४) मैं ज्वर को नमस्कार कर के उसे निम्न स्थान में जाने के लिए प्रेरित करता हूं. मुक्के के eBook converter DEMO Watermarks*