अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 253, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंसमान प्रहार करने वाला ज्वर महावृषभ को पुनः प्राप्त हो. (४) ओको अस्य मूजवन्त ओको अस्य महावृषा:. यावज्जातस्तक्मंस्तावानसि बह्लिकेषु न्योचर:.. (५) मूंज से युक्त स्थान इस ज्वर का घर है तथा वीर्य की महान वर्षा करने वाले इस के स्थान हैं. हे तक्मा! तू बाह्लीक देश में जितना है, उतना ही उत्पन्न हुआ है. (५) तक्मन् व्याल वि गद व्यङ्ग भूरि यावय. दासीं निष्क्व्रीमिच्छ तां वज्रेण समर्पय.. (६) हे जीवन को सर्प के समान कष्ट देने वाले ज्वर! तू चोरी कर ने वाली दासी से वज्र रूप में मिल और हम से अपनेआप को दूर रख. (६) तक्मन् मूजवतो गच्छ बह्लिकान् वा परस्तराम्. शूद्रामिच्छ प्रफर्व्यं १ तां तक्मन् वीव धूनुहि.. (७) हे तक्मा! तू मूंज वाले प्रदेश को अथवा बाह्लीक देश को अथवा उस से भी दूर चला जा. तू प्रसव अवस्था वाली दासी से मिल और उसे कंपित कर. (७) महावृषान् मूजवतो बन्ध्वद्धि परेत्य. प्रैतानि तक्मने ब्रूमो अन्यक्षेत्राणि वा इमा.. (८) हम मूंज वाले एवं अधिक वर्षा वाले स्थानों पर जाने के लिए ज्वर से निवेदन करते हैं कि तू वहां जा कर अथवा अन्य स्थानों पर जा कर वहां की वस्तुओं का भक्षण कर. (८) अन्यक्षेत्रे न रमसे वशी सन् मृडयासि न:. अभूदु प्रार्थस्तक्मा स गमिष्यति बह्लिकान्.. (९) हे ज्वर! तू अन्य स्थानों में क्यों रमण नहीं करता है? तू हमारे वश में हो कर हमें सुखी बना. हम तुझ से बाह्लीक देश में जाने की प्रार्थना करते हैं. (९) यत् त्वं शीतो ऽ थो रूर: सह कासावेपय:. भीमास्ते तक्मन् हेतयस्ताभि: स्म परि वृङ्ग्धि न:.. (१०) हे ज्वर! तू शीत के साथ रहता है तथा खांसी के साथ कंपित करने वाला है. तेरे आयुध भयंकर हैं. इन के साथ तू हम से दूर चला जा. (१०) मा स्मैतान्त्सखीन् कुरुथा बलासं कासमुद्युगम्. मा स्मातो ऽ वर्डै: पुनस्तत् त्वा तक्मन्नुप ब्रुवे.. (११) ebook converter DEMO Watermarks*