भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 261, कुल 1063 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 261

हे धाता! इस नारी की आंतों से निकले मूत्र को मूत्राशय में ले जाने वाली जो नालियां दोनों पसलियों की ओर स्थित हैं, उन में स्थित पुत्र गर्भ को पुष्ट करो, जिस से यह दसवें मास में प्रसव कर सके. (१०) त्वष्टः श्रेष्ठेन रूपेणास्या नार्या गवीन्योः. पुमांसं पुत्रमा धेहि दशमे मासि सूतवे.. (११) हे त्वष्टा! इस नारी की आंतों से निकले मूत्र को मूत्राशय में ले जाने वाली जो नाड़ियां दोनों पसलियों की ओर स्थित हैं, उन में स्थित पुत्र गर्भ को पुष्ट करो. जिस से यह दसवें मास में प्रसव कर सके. (११) सवितः श्रेष्ठेन रूपेणास्या नार्या गवीन्योः. पुमांसं पुत्रमा धेहि दशमे मासि सूतवे.. (१२) हे सविता! इस नारी की आंतों से निकले मूत्र को मूत्राशय में ले जाने वाली जो नालियां दोनों पसलियों की ओर स्थित हैं, उन में स्थित पुत्र गर्भ को पुष्ट करो, जिस से यह दसवें मास में प्रसव कर सके. (१२) प्रजापते श्रेष्ठेन रूपेणास्या नार्या गवीन्योः. पुमांसं पुत्रमा धेहि दशमे मासि सूतवे.. (१३) हे प्रजापति! इस नारी की आंतों से निकले मूत्र को मूत्राशय तक ले जाने वाली जो नाड़ियां दोनों पसलियों की ओर स्थित हैं, उन में स्थित पुत्र गर्भ को पुष्ट करो, जिस से यह दसवें मास में प्रसव कर सके. (१३) सूक्त-२६ देवता—अग्नि यजूंषि यज्ञे समिधः स्वाहाग्निः प्रविद्वानिह वो युनक्तु.. (१) यजुर्वेद के मंत्रो और समिधाओ! सब कुछ जानने वाले अग्नि देव इस यज्ञ में तुम से मिलें. (१) युनक्तु देवः सविता प्रजानन्नस्मिन् यज्ञे महिषः स्वाहा.. (२) सब को उत्पन्न करने वाले सविता देव इस यज्ञ में तुम से मिलें. उन के लिए यह आहुति सुंदर हो. (२) इन्द्र उक्थामदान्यस्मिन् यज्ञे प्रविद्वान् युनक्तु सुयुजः स्वाहा.. (३) हे उक्त कर्म करने वालो! सब कुछ जानने वाले इंद्र इस यज्ञ में तुम से मिलें. उन के ebook converter DEMO Watermarks*