भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 262, कुल 1063 में से

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निमित्त यह आहुति सुंदर हो. (३) प्रैषा यज्ञे निविदः स्वाहा शिष्टाः पत्नीभिर्वहतेह युक्ताः.. (४) हे शिष्ट मनुष्यो! तुम अपनी पत्नियों के सहित इस यज्ञ में आदेशों को धारण करो. यह आहुति उत्तम हो. (४) छन्दांसि यज्ञे मरुतः स्वाहा मातेव पुत्रं पिपृतेह युक्ताः.. (५) जिस प्रकार माता पुत्र का पालन करती है, उसी प्रकार इस यज्ञ में मरुद्गण छंदों का पालन करें. मरुद्गण के लिए यह आहुति उत्तम हो. (५) एयमगन् बर्हिषा प्रोक्षणीभिर्यज्ञं तन्वानादितिः स्वाहा (६) यह अदितिदेवी कुशों और प्रोक्षणियों के साथ यज्ञ का वर्णन करती हुई आई है. (६) विष्णुर्युनक्तु बहुधा तपांस्यस्मिन् यज्ञे सुयुजः स्वाहा.. (७) भगवान विष्णु भलीभांति किए गए तपों का फल दें. यह आहुति विष्णु के निमित्त उत्तम हो. (७) त्वष्टा युनक्तु बहुधा नु रूपा अस्मिन् यज्ञे सुयुजः स्वाहा.. (८) त्वष्टा देव इस यज्ञ में भलीभांति संभाले गए रूपों को संयुक्त करें. यह आहुति त्वष्टा देव के निमित्त हो. (८) भगो युनक्त्वाशिषो न्व १ स्मा अस्मिन् यज्ञे प्रविद्वान् युनक्तु सुयुजः स्वाहा.. (९) भग देवता इस यज्ञ में सुंदर आशीर्वाद प्रदान करें. यह आहुति उन के निमित्त हो. (९) सोमो युनक्तु बहुधा पयांस्यस्मिन् यज्ञे सुयुजः स्वाहा.. (१०) सोमदेव इस यज्ञ में संयुक्त होने वाले जलों को मिलाएं. यह आहुति उन के निमित्त हो. (१०) इन्द्रो युनक्तु बहुधा वीर्याण्यस्मिन् यज्ञे सुयुजः स्वाहा.. (११) इंद्र इस यज्ञ में यज्ञ के अनुरूप शक्तियों को संयुक्त करें. यह आहुति इंद्र के निमित्त हो. (११) अश्विना ब्रह्मणा यातमर्वाञ्चौ वषट्कारेण यज्ञं वर्धयन्तौ. ebook converter DEMO Watermarks*

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