भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 323, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 323

तुम्हारे भयानक मुख में हवि डालता हूं तथा घाव को धोने के लिए यह हवि ओषधि युक्त जल प्रयोग करता हूं. तुम्हें ज्ञानहीन जन पृथ्वी समझते हैं. तुम्हारा स्वरूप जानता हुआ मैं सभी प्रकार निर्ऋति अर्थात् सभी रोगों का कारण जानता हूं. (१) भूते हविष्मती भवैष ते भागो यो अस्मासु. मुञ्चेमानमूनेनसः स्वाहा.. (२) हे सर्वत्र विद्यमान निर्ऋति! तुम हमारे द्वारा दिया हुआ आज्य स्वीकार करो. यह तुम्हारा भाग्य है जो इस समय हम ने निश्चित् किया है. तुम हमें रोग के कारण पाप से बचाओ. हमारा यह हवि उत्तम आहुति वाला हो. (२) एवो ष्व १ स्मन्निर्ऋते ऽ नेहा त्वमयस्मयान् वि चृता बन्धपाशान्. यमो मह्यं पुनरित् त्वां ददाति तस्मै यमाय नमो अस्तु मृत्यवे.. (३) हे पाप देवता निर्ऋति! तुम हमें बाधा न पहुंचाती हुई अत्यंत दृढ़ बंधन वाले रस्सी के फंदों को हम से दूर करो. ये फंदे रोगात्मक हैं. हे रोगी! यमराज तुम्हें मेरे लिए देते हैं. मृत्यु के देवता उस यम को नमस्कार है. (३) अयस्मये द्रुपदे बेधिष इहाभिहितो मृत्युभिर्ये सहस्रम्. यमेन त्वं पितृभिः संविदान उत्तमं नाकमधि रोहयेमम्.. (४) हे निर्ऋति! लोहे की श्रृंखलाओं से अथवा लकड़ी के बने चरण बंधन से जब तुम किसी पुरुष को बांधती हो, तब वह इस लोक में मृत्यु के द्वारा बद्ध हो जाता है. प्रसिद्ध ज्वर आदि रोग और राक्षस, पिशाच आदि मृत्यु के हजारों कारण हैं. हे निर्ऋति! तुम मृत्यु के देव यम से और देवता, पितर आदि से तालमेल कर के इस पुरुष को उत्तम सुख प्रदान करो. (४) सूक्त-८५ देवता—वनस्पति वरणो वारयाता अयं देवो वनस्पतिः. यक्ष्मो यो अस्मिन्नाविष्टस्तमु देवा अवीवरन्.. (१) यह दिव्य गुण युक्त वरण नाम की वनस्पति से बनी हुई मणि राजयक्ष्मा रोग का निवारण करे. इस पुरुष में जिस यक्ष्मा रोग का निवास है, उस रोग का निवारण इंद्र आदि देव करें. (१) इन्द्रस्य वचसा वयं मित्रस्य वरुणस्य च. देवानां सर्वेषां वाचा यक्ष्मं ते वारयामहे.. (२) हे रोगी पुरुष! तेरे हाथ में वरण वृक्ष से बनी हुई मणि बांधने वाले हम सब इंद्र, मित्र और वरुण की आज्ञा से यक्ष्मा रोग का निवारण करते हैं. हम सभी देवों की आज्ञा से तेरे यक्ष्मा रोग को तेरे शरीर से निकालते हैं. (२) ebook converter DEMO Watermarks*