भारतकोश
अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Atharvaveda Samhita with Hindi Translation

डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished1,063 पृष्ठ

पृष्ठ 327, कुल 1063 में से

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पृष्ठ 327

इमं यवमष्टायोगैः षड्योगेभिरचर्कृषुः. तेना ते तन्वो ३ रपो ऽ पाचीनमप व्यये.. (१) ओषधि के रूप में प्रयोग में लाए जाते हुए जौ को आठ बैलों वाले तथा छः बैलों वाले हल से जोत कर उत्पन्न किया गया है. हे रोगी! उस जौ से मैं तेरे शरीर के रोग के कारण पाप को दूर करता हूं. (१) न्यग्् वातो वाति न्यक् तपति सूर्यः. नीचीनमघ्न्या दुहे न्यग् भवतु ते रपः.. (२) वायु जिस प्रकार नीचे चलती है, सूर्य जिस प्रकार नीचे तपते हैं, जिस प्रकार गायों से नीचे की ओर दूध काढ़ा जाता है, हे रोगी! उसी प्रकार तेरे रोग का कारण पाप शांत हो जाए. (२) आप इद् वा उ भेषजीरापो अमीवचातनीः. आपो विश्वस्य भेषजीस्तास्ते कृण्वन्तु भेषजम्.. (३) सभी ओषधियां जल का विकार हैं. इस प्रकार जल ही रोग निवारण के लिए उत्तम ओषधि है. जल सारे संसार के लिए ओषधि रूप है, वे ही जल तेरे लिए रोग निवारक ओषधि बनें. (३) सूक्त-९२ देवता—बाजि अर्थात् घोड़ा वातरंहा भव वाजिन् युज्यमान इन्द्रस्य याहि प्रसवे मनोजवाः. युञ्जन्तु त्वा मरुतो विश्ववेदस आ ते त्वष्टा पत्सु जवं दधातु.. (१) हे रथ के जुए में जुते हुए अश्व! तू वायु के समान तेज चलने वाला बन. इंद्र की प्रेरणा होने पर तू मन के समान वेग से गंतव्य पर पहुंच. सारे संसार को जानने वाले उनचास मरुद्गण तुझ से मिल जाएं एवं त्वष्टा देव तेरे चरणों को वेग प्रदान करें. (१) जवस्ते अर्वन् निहितो गुहा यः श्येने वात उत यो ऽ चरत् परीत्तः. तेन त्वं वाजिन् बलवान् बलेनाजिं जय समने पारयिष्णुः.. (२) हे अश्व! तेरा वेग असाधारण स्थान गुफा में छिपा है. तेरा जो वेग बाज पक्षी और वायु में सुरक्षित है, तू उसी वेगशाली बल से बलवान हो कर हमें संग्राम में सफलता दिला. (२) तनूष्टे वाजिन् तन्वं१ नयन्ती वाममस्मभ्यं धातवु शर्म तुभ्यम्. अहुतो महो धरुणाय देवो दिवीव ज्योतिः स्वमा मिमीयात्.. (३) हे वेगवान अश्व! सवार के शरीर को युद्धभूमि में पहुंचाता हुआ तेरा शरीर हमें धन प्राप्त ebook converter DEMO Watermarks*