अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 326, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंदिया है. उन के द्वारा उत्पन्न विशेष स्नेह से मैं तुम्हारे मन को संताप युक्त करता हूं. (१) शोचयामसि ते हार्दि शोचयामसि ते मनः. वातं धूम इव सध्य १ ङ् मामेवान्वेतु ते मनः.. (२) हे पति और पत्नी! मैं तुम दोनों के हृदयों को परस्पर प्रेम उत्पन्न कर के संतप्त करता हूं. मैं तुम्हारे मन को उसी प्रकार संतप्त करता हूं, जिस प्रकार धुआं वायु का अनुगमन करता है. तुम्हारा मन इसी प्रकार मेरा अनुगामी हो. (२) मह्यं त्वा मित्रावरुणो मह्यं देवी सरस्वती. मह्यं त्वा मध्यं भूम्या उभावन्तौ समस्यताम्.. (३) हे पत्नी! मित्र और वरुण देव तुम्हें मुझ से मिलाएं. सरस्वती देवी तुम्हें मुझ से मिलाएं. धरती पर स्थित सभी प्राणी तुम्हें मुझ से मिलाएं तथा इस भूमि के ऊपर और नीचे के प्रदेश तुम्हें मुझ से मिलाएं. (३) सूक्त-९० देवता—रुद्र यां ते रुद्र इषुमास्यदङ्गेभ्यो हृदयाय च. इदं तामद्य त्वद् वयं विषूचीं वि वृहामसि.. (१) हे रोगी! तेरे हाथ, पैर और हृदय आदि अंगों को बेधने के लिए रुद्र देव ने जो बाण अपने धनुष पर चढ़ा कर फेंका है, आज मैं उस का प्रतिकार करने के लिए उस बाण को तुझ से विमुख करने के लिए शरीर से दूर फेंकता हूं. (१) यास्ते शतं धमनयो ऽ ङ्गान्यनु विष्ठिताः. तासां ते सर्वासां वयं निर्विषाणि ह्वयामसि.. (२) हे शूल रोगी! तेरे हाथ, पैर आदि अंगों में जो सैकड़ों धमनी नाड़ियां स्थित हैं, उन के लिए मैं विषरहित एवं शूलहीन ओषधियां बनाता हूं. (२) नमस्ते रुद्रास्यते नमः प्रतिहितायै. नमो विसृज्यमानायै नमो निपतितायै.. (३) हे व्याधि रूप अस्त्र चलाने वाले रुद्र! तुम को नमस्कार है. धनुष पर चढ़े हुए तुम्हारे बाण को नमस्कार है. धनुष से छोड़े जाते हुए तुम्हारे बाण को नमस्कार है. लक्ष्य पर गिरने वाले तुम्हारे बाण को नमस्कार है. (३) सूक्त-९१ देवता—यक्ष्मा का विनाश ebook converter DEMO Watermarks*