अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंतुम सब भी अपने हृदयों को मेरे हृदय का अनुगमन करने वाला बनाओ. तुम्हारे हृदय मेरे वश में हों एवं तुम सब मेरा अनुगमन करो. (२) ओते मे द्यावापृथिवी ओता देवी सरस्वती. ओतौ म इन्द्रश्चाग्निश्चर्ध्यास्मेदं सरस्वति.. (३) धरती और आकाश सदा मेरे सम्मुख और परस्पर संबद्ध रहें. देवी सरस्वती भी मेरे अभिमुख और अनुकूल रहे. इंद्र और अग्नि मेरे अनुकूल रहें. हे सरस्वती देवी! इस समय हम समृद्ध हों. (३) सूक्त-९५ देवता—वनस्पति अश्वत्थो देवसदनस्तृतीयस्यामितो दिवि. तत्रामृतस्य चक्षणं देवाः कुष्ठमवन्वत.. (१) तीसरे आकाश में देवों का स्थान पीपल है. वहां देवों ने अमृत के गुण वाले वनस्पति कूठ को जाना. (१) हिरण्ययी नौरचरद्धिरण्यरबन्धना दिवि. तत्रामृतस्य पुष्पं देवाः कुष्ठमवन्वत.. (२) देवों ने सोने के बंधनों वाली स्वर्ग की नाभि के द्वारा कूठ वनस्पति को प्राप्त किया, जो अमृत का पुरुष है. (२) गर्भो अस्योषधीनां गर्भो हिमवतामृत. गर्भो विश्वस्य भूतस्येमं मे अगदं कृधि.. (३) हे अग्नि! तुम वर्षा से उत्पन्न होने वाली वनस्पतियों के भीतर स्थित हो तथा शीतल स्पर्श वाली वनस्पतियों में भी स्थित हो. तुम संसार के सभी प्राणियों में स्थित हो. तुम मेरे इस मनुष्य को रोग रहित बनाओ. (३) सूक्त-९६ देवता—वनस्पति, सोम या ओषधयः सोमराज्ञीर्बह्वीः शतविचक्षणाः. बृहस्पतिप्रसूतास्ता नो मुञ्चन्त्वंहसः.. (१) जिन वृक्षों और वनस्पतियों के राजा सोम हैं तथा जो रस, वीर्य आदि के विपाक के कारण सैकड़ों प्रकार की दिखाई देती हैं, बृहस्पति देव के द्वारा उन रोगों की ओषधि के रूप में नियत वे वनस्पतियां हमें पाप से बचाएं. (१) ebook converter DEMO Watermarks*