अथर्ववेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Atharvaveda Samhita with Hindi Translation
डा. गंगा सहाय शर्मा द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 330, कुल 1063 में से
संदर्भ में पढ़ेंमुञ्चन्तु मा शपथ्या ३ दथो वरुण्या दुत. अथो यमस्य पड्वीशाद् विश्वस्माद् देवकिल्बिषात्.. (२) जल अथवा ओषधियां मुझे ब्राह्मणों के क्रोध से उत्पन्न पाप से बचाएं तथा वरुण देव द्वारा निश्चित असत्य भाषण आदि पाप से भी बचाएं. वे हमें यम के उस फंदे से बचाएं जो पैरों को बांधता है. वे मुझे सभी देवों से संबंधित पापों से बचाएं. (२) यच्चक्षुषा मनसा यच्च वाचोपारिम जाग्रतो यत् स्वपन्तः. सोमस्तानि स्वधया नः पुनातु.. (३) हमने आंखों के द्वारा, मन के द्वारा, वाणी के द्वारा जागते हुए अथवा सोते हुए जो पाप किए हैं. पितृलोक के स्वामी सोमदेव पितरों को लक्ष्य कर के किए गए पितृ कर्म के द्वारा हमें पवित्र करें. (३) सूक्त-९७ देवता—मित्र, वरुण अभिभूर्यज्ञो अभिभूरग्निरभिभूः सोमो अभिभूरिन्द्रः. अभ्य १ हं विश्वाः पृतना यथासान्येवा विधेमाग्निहोत्रा इदं हविः.. (१) विजय की कामना करने वाले हम लोगों के द्वारा किया हुआ यज्ञ शत्रुओं का पराभव करने वाला हो. यज्ञों को पूर्ण करने वाले अग्नि एवं यज्ञ के साधन सोम शत्रुओं को पराजित करें. इंद्र एवं सभी शत्रु सेनाओं को पराजित करने के इच्छुक हम शत्रु की सभी सेनाओं को जिस प्रकार पराजित करें, उसी के निमित्त संग्राम में विजय के इच्छुक हम हवि का हवन करते हैं. (१) स्वधा ऽ स्तु मित्रावरुणा विपश्चिता प्रजावत् क्षत्रं मधुनेह पिन्वतम्. बाधेथां दूरं निर्ऋतिं पराचैः. कृतं चिदेनः प्र मुमुक्तमस्मत्.. (२) हे मेधावी मित्र और वरुण! तुम्हारे लिए दिया गया वह हवि रूप अन्न तुम्हें तृप्ति दे. तुम इस राजा पर प्रजाओं से युक्त बल एवं मधुर रस सींचो. तुम पराजय करने वाली पाप देवी निर्ऋति को हम से विमुख कर के दूर देश में ले जाओ. तुम हमारे शत्रुओं के द्वारा किया हुआ पाप हम से दूर ले जाओ. (२) इमं वीरमनु हर्षध्वमुग्रमिन्द्रं सखायो अनु सं रभध्वम्. ग्रामजितं गोजितं वज्रबाहुं जयन्तमज्म प्रमृणन्तमोजसा.. (३) हे सैनिको! अधिक बलशाली एवं परम ऐश्वर्य युक्त इस वीर राजा की वीरता से प्रसन्न बनो एवं इस के लिए युद्ध हेतु तत्पर रहो. हे मरुतो! गांवों को एवं शत्रुओं की गायों को जीतने वाले तथा हाथ में वज्र धारण करने वाले इंद्र की वीरता से प्रसन्न बनो. इंद्र शत्रुओं को जीतने ebook converter DEMO Watermarks*